500 करोड़ से अधिक के रीएजेंट घोटाले में एक और गिरफ्तारी, एसीबी–ईओडब्ल्यू की संयुक्त कार्रवाई

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The Duniyadari : रायपुर। छत्तीसगढ़ में उजागर हुए 500 करोड़ रुपये से अधिक के चर्चित रीएजेंट खरीदी घोटाले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त टीम ने इस मामले में एक और अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है। डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को रायपुर से गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पेश किया गया, जहां से उसे 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

एसीबी-ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 120(बी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए) सहपठित 13(2) एवं 7(सी) के तहत अपराध दर्ज किया है। यह मामला राज्य की ‘हमर लैब योजना’ के अंतर्गत मेडिकल उपकरणों में उपयोग होने वाले रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की खरीदी से जुड़ा है, जिसमें शासकीय धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के साक्ष्य मिले हैं।

जांच में सामने आया है कि डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अपने उत्पादों के लिए पहले से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित कर रखा था। इसके बावजूद आरोपी कुंजल शर्मा ने कंपनी की आंतरिक नीतियों को नजरअंदाज करते हुए मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से षड्यंत्र रचा। विवेचना के अनुसार, कुंजल शर्मा ने शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर साजिश के तहत डायसिस कंपनी की ओर से छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) को रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए एमआरपी से कहीं अधिक दरों और शर्तों के प्रस्ताव अनधिकृत रूप से भेजे।

इसका परिणाम यह हुआ कि निविदा प्रक्रिया के दौरान CGMSC ने मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा प्रस्तुत अत्यधिक और मनमानी दरों को स्वीकृति दे दी। बाद में मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से दो से तीन गुना अधिक कीमत पर सामग्री की आपूर्ति की, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और सरकारी राशि का भारी दुरुपयोग हुआ।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें निजी कंपनियों और कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों की मिलीभगत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। एसीबी-ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से महत्वपूर्ण दस्तावेज, ईमेल संवाद और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा किस स्तर पर एमआरपी से अधिक दरों को मंजूरी दिलाई गई।

एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ‘हमर लैब योजना’ से जुड़े इस घोटाले की हर कड़ी की गहन जांच की जा रही है। अब तक की जांच में संकेत मिले हैं कि मामला किसी एक व्यक्ति या कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई स्तरों तक जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। एसीबी-ईओडब्ल्यू ने दोहराया है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और जनहित की योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।