सड़क हादसा मुआवजा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील ठुकराई, 53.40 लाख का मुआवजा बरकरार

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The Duniyadari: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सड़क दुर्घटना से जुड़े मुआवजा प्रकरण में बीमा कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा मृतक के परिवार को दिए गए 53.40 लाख रुपये के मुआवजे को उचित और कानूनी रूप से सही ठहराया।

यह मामला 4 दिसंबर 2021 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जयमंगल राजवाड़े अपनी मारुति कार से अंबिकापुर से कोरबा की ओर जा रहे थे। बांगो थाना क्षेत्र के गांधी नगर बंजारी मुख्य मार्ग पर सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

मृतक की पत्नी और बच्चों ने दावा किया कि जयमंगल राजवाड़े 42 वर्ष के थे और निजी प्रेस में कार्य करने के साथ जूस सेंटर भी संचालित करते थे। परिवार ने उनकी आय के आधार पर अधिक मुआवजे की मांग की थी।

बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि दुर्घटना में मृतक की भी आंशिक लापरवाही थी। कंपनी ने संबंधित वाहन चालक को गवाह के रूप में पेश कर यह साबित करने का प्रयास किया कि टक्कर के लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार थे।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि बीमा कंपनी सहभागी लापरवाही साबित करने के लिए ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य पेश करने में विफल रही। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आमने-सामने की टक्कर को आधार बनाकर मृतक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। प्रस्तुत दस्तावेजों से यह स्पष्ट था कि मृतक अपनी निर्धारित लेन में वाहन चला रहे थे।

अदालत ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बिना ठोस प्रमाण के सहभागी लापरवाही का निष्कर्ष निकालना विधि सम्मत नहीं है। इसी आधार पर बीमा कंपनी की अपील निरस्त कर दी गई और अधिकरण द्वारा निर्धारित 53.40 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति को यथावत रखा गया।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निर्धारित मुआवजा राशि परिस्थितियों के अनुरूप न्यायसंगत है और उसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।