The Duniyadari: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों एलपीजी गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। लोगों का कहना है कि सिलेंडर बुक कराने के बाद भी चार से पांच दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई जगह मोबाइल से बुकिंग भी नहीं हो पा रही है। जिन परिवारों के पास केवल एक ही सिलेंडर है, उनके सामने सबसे ज्यादा परेशानी खड़ी हो गई है।
गैस की कमी का असर अब आम लोगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस की आपूर्ति बाधित होने से करीब 250 छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्ट्रीट फूड बेचने वाले ठेलों की संख्या भी काफी कम हो गई है, जिससे लोगों के रोजमर्रा के कारोबार पर असर पड़ा है। बताया जा रहा है कि लगभग 40 प्रतिशत स्ट्रीट फूड ठेले फिलहाल नहीं लग पा रहे हैं, जिससे खान-पान की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने लगी है।
गैस संकट का असर प्लास्टिक, पैकेजिंग और दवा उद्योगों पर भी पड़ा है। कई जगह उत्पादन धीमा हो गया है तो कुछ इकाइयों में काम पूरी तरह ठप हो गया है। वहीं ब्रज क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील गैस के बजाय अब चूल्हों पर तैयार किया जा रहा है।
फिरोजाबाद में गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर चूड़ी उद्योग पर पड़ा है। यहां बंद पड़े चूड़ी कारखानों की संख्या 90 से बढ़कर 112 तक पहुंच गई है। एटा और कासगंज में भी गैस सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी लाइनें देखी गईं।
पूर्वांचल के वाराणसी समेत कई जिलों में भी हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं। रविवार को भी हजारों उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों के चक्कर लगाते नजर आए। औद्योगिक इलाकों में गैस की कमी के कारण करीब 30 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हुआ है। पैकेजिंग इकाइयों में सिलेंडर न मिलने से पिछले एक सप्ताह से काम बंद पड़ा है।
गैस संकट के चलते कई जगह तनाव की स्थिति भी बन रही है। जौनपुर में एक गैस एजेंसी पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई, जबकि बलिया में गैस गोदाम के मैनेजर को तमंचा दिखाकर धमकाने का मामला सामने आया है। बढ़ती भीड़ और विवाद की आशंका को देखते हुए कई एजेंसियों के बाहर कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गया है।















