Sunday, March 29, 2026
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पश्चिम एशिया तनाव का असर: छत्तीसगढ़ में LPG की मांग दोगुनी, जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका बढ़ी

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The Duniyadari: रायपुर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। राज्य के कई जिलों से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। अचानक बढ़ी मांग से उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। हालात ऐसे हैं कि संकट की आशंका के बीच लोग बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर बुक करा रहे हैं, जिससे कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका भी बढ़ गई है।

ऑयल कंपनियों की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में कुल 66.62 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता हैं। इनमें से सामान्य दिनों में केवल 10 प्रतिशत यानी 6.86 लाख उपभोक्ता ही हर महीने गैस सिलेंडर बुक कराते थे। वहीं 24.98 लाख उपभोक्ता (38 प्रतिशत) एक से तीन महीने में सिलेंडर लेते थे। इसके अलावा 19.54 लाख यानी 29 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने पिछले एक साल में एक भी सिलेंडर बुक नहीं कराया। जबकि 15.22 लाख यानी 23 प्रतिशत उपभोक्ता छह महीने में एक बार सिलेंडर रिफिल कराते थे।

इन्हीं आंकड़ों के आधार पर युद्ध संकट से पहले छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन करीब 74 हजार सिलेंडर की बुकिंग होती थी, लेकिन पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद यह आंकड़ा अचानक बढ़कर 1.42 लाख सिलेंडर प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

राजधानी रायपुर में सबसे ज्यादा असर

राजधानी रायपुर में भी अचानक मांग में उछाल देखा गया है। सामान्य दिनों में यहां रोजाना करीब 4,500 से 5,000 सिलेंडर की बुकिंग होती थी, लेकिन संकट की आशंका के बाद यह संख्या बढ़कर 16 हजार तक पहुंच गई। इससे साफ है कि पहले कम सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ता भी अब अतिरिक्त बुकिंग कर रहे हैं।

उज्ज्वला कनेक्शन से बढ़ी बुकिंग

जानकारों के अनुसार राज्य के लगभग 38 लाख उपभोक्ता उज्ज्वला योजना से जुड़े हैं। सामान्य तौर पर ये उपभोक्ता साल में केवल दो से चार सिलेंडर ही लेते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में इसी श्रेणी में अचानक बुकिंग बढ़ी है।

बताया जा रहा है कि होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति 20 प्रतिशत तक सीमित होने के बाद कुछ लोगों ने घरेलू गैस के जरिए जरूरत पूरी करने का रास्ता निकाला। इसके अलावा जमाखोरी के लिए भी घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अचानक बढ़ी मांग के चलते गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन अब स्थिति पर नजर बनाए हुए है।