Thursday, April 2, 2026
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हनुमान जयंती : भक्ति, बल और समर्पण का दिव्य पर्व

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The Duniyadari: रायपुर। भारतीय सनातन परंपरा में हर पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक संदेश भी लेकर आता है। इन्हीं पावन पर्वों में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान हनुमान के अद्भुत पराक्रम, अटूट भक्ति और सेवा भाव को स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। हनुमान जयंती हमें साहस, समर्पण, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

पवनपुत्र हनुमान का जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मबल को जागृत करने का पर्व भी माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और धैर्य को बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। माना जाता है कि हनुमान जी की भक्ति से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है तथा व्यक्ति को नई ऊर्जा मिलती है।

हनुमान जी के अवतरण का आध्यात्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए वानर रूप में अवतार लिया। चैत्र मास की पूर्णिमा को जन्मे हनुमान जी केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक ही नहीं, बल्कि बुद्धि, भक्ति और विनम्रता के भी आदर्श माने जाते हैं।

द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जा रही है। यह दिन साधना, आत्मचिंतन और संकल्प का विशेष अवसर होता है। श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का पाठ और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान हनुमान से शक्ति, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं।

हनुमान जयंती हमें यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति, निष्ठा और परिश्रम से व्यक्ति जीवन में किसी भी कठिनाई को पार कर सकता है और साधारण से असाधारण बन सकता है।