Saturday, August 29, 2026
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कोरबा के घंटाघर ओपन थिएटर में सजा लोक संस्कृति का रंगमंच, भोजली शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब; महापौर संजू देवी राजपूत ने लोक परंपराओं को सहेजने का दिया संदेश

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The Duniyadari: भोजली महोत्सव में दिखा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग, महापौर संजू देवी की मौजूदगी ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा

कोरबा। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भोजली पर्व शनिवार को कोरबा में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। घंटाघर स्थित ओपन थिएटर में आयोजित प्रदेश स्तरीय भोजली महोत्सव 2026 में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जिला कोरबा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महापौर संजू देवी राजपूत भी शामिल हुईं।

महोत्सव के दौरान निकाली गई भोजली शोभायात्रा में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति की जीवंत झलक नजर आई। लोकगीतों, पारंपरिक परिधानों और उत्साह से भरे माहौल ने पूरे आयोजन को खास बना दिया। शोभायात्रा के दौरान लोगों ने भोजली परंपरा के प्रति अपनी आस्था और जुड़ाव भी प्रदर्शित किया।

महापौर ने बताया लोक विरासत का पर्व

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर संजू देवी राजपूत ने कहा कि भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की मिट्टी और लोकजीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने वाली परंपरा भी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखना बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजन बच्चों और युवाओं को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भोजली महोत्सव के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

आयोजन में जुटे जनप्रतिनिधि और नागरिक

महापौर के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर आयोजकों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने आयोजन में शामिल लोगों से मुलाकात की और भोजली महोत्सव की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

कार्यक्रम में नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एल्डरमैन दीपक यादव, रामकुमार ठाकुर, दिलीप मिरी, धीरेंद्र साहू, अतुलदास महंत, एलएच टोप्पो समेत छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और शहर के बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

शोभायात्रा में नजर आई एकजुटता

भोजली शोभायात्रा के दौरान अलग-अलग समुदाय और वर्ग के लोग एक साथ शामिल हुए। पारंपरिक रंग में सजे आयोजन ने सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दिया। लोगों की भागीदारी से शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

कोरबा में आयोजित इस महोत्सव ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं आज भी लोगों के जीवन और सामाजिक रिश्तों से मजबूती से जुड़ी हुई हैं। भोजली जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ प्रदेश की लोक विरासत को आगे बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं।