खाद और खाज ,मौखिक में थानेदारी, मरा हुआ हाथी तो… डीएमसी की डमरू,गोठ बात…

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मौखिक में थानेदारी..कहीं पड़ न जाये भारी

जिले में थाना चलाने के लिए विभाग ने नया प्रयोग किया गया है।  इस नए प्रयोग से थानेदार बिना

 लिखित आदेश के थानेदारी कर रहे हैं। उच्च अधिकारियों के आदेश पर चल रहे इस प्रयोग का न तो विभाग के अफसरों को समझ आ रहा है और न इसके जानकारों को !

खबरीलाल की माने तो पाली , बांगो , कटघोरा और दीपका थाना के थानेदार इस नए प्रयोग के फेर में उलझकर थानेदारी कर रहे हैं। अब जब कोई बात फंसती है तब क्या होगा। खैर यह बात विभाग के उच्च अधिकारियों को समझने की  जरूरत है। लेकिन, जिस तरह का उपयोग थानेदारों का हो रहा है उसे सुनकर सभी सकते में है? खबर तो ये भी है की एक नए थानेदार ने कोरबा आते ही बालको थाना की जिद्द्द पकड़ ली थी, लेकिन उसे बड़े थाने का प्रभारी बनाया गया है।

यहां मरा हुआ हाथी तो छोड़िए कुर्सी भी लाखों की..

कहते है हर मरा हुआ हाथी सवा लाख का होता है पर यहां तो हाथी छोड़िए जनाब ट्रांसफर के बाद भी कुर्सी लाखों की है। दरअसल वन विभाग के एक लिपिक का ट्रांसफर प्रमोशन के साथ सीसीएफ कार्यालय में हुआ और कोरबा डिवीजन में नए लिपिक की पोस्टिंग हुई।

अंगद की तरह पांव जमा कर बैठे लिपिक की ट्रांसफर के बाद विभाग के अधिकारी राहत की सांस ले रहे थे, पर उन्हें क्या पता कि कोरबा डिवीजन के लिपिक की कुर्सी इतनी मंहगी है जो आसानी से नहीं छूटेगा। हुआ भी यही ट्रांसफर के बाद वन विभाग की मलाई खा चुके बड़े बाबू ने अपना स्थानांतरण को कोरबा अटैच करा कर फिर से कुर्सी पर अधिकार जमा लिया।

हां ये बात अलग है कि जिस लिपिक की कोरबा डिवीजन में पोस्टिंग हुई थी उसे ब्यय 2 में कुर्सी देकर सन्तुष्ट कर दिया गया। कहा तो यह भी जा रहा है कि इस खेल में विभाग के उच्च अधिकारी और वन वृत्त के अधिकारी का आर्शीवाद है। हो भी क्यों न एक जानकारी की माने तो मार्च क्लोजिंग टाइम में लाखों की कमाई जो हुई थी। तो कुर्सी के लिए कुछ तो खर्चा करना पड़ेगा।

 डीएमसी की डमरू पर नाच रहे….

किसी सरकारी दफ्तर में खरीदी हो या भर्ती या फिर हो पोस्टिंग , सभी में डीएमसी का दखल रहता है। पहली बार इस नंबर दो के अधिकारी का रुतबा देख विभागीय अधिकारी और कर्मचारी कहने लगे है कि डीएमसीसी के डमरू में विभाग के उच्च अधिकारी भी नाच रहे हैं।

दरअसल उच्चाधिकारी के हर फैसले पर दखल रखने वाले इस डीएमसी को सुपर डीईओ भी कहा जाने लगा है। खबर तो यह भी अब विभाग में कोई भी काम कराना हो तो आप सीधा उनके पास चले जाइये, सब बिगड़े काम बन जायेंगे ! ख़ैर कहा तो यह भी जा रहा है कि जिसकी कुछ दिनों पहले पुछारी नहीं थी वो अब बॉस बन गया है।  उसके विभागीय रुतबा को देखते लोग भी कहने लगे हैं ” सब समय की माया और जहां माया है वहां तो रंक भी राजा बन जाता है। ठीक उसी तरह डीएमसी का तो छोड़िए उनके डमरू से भी विभाग के लोग नाच रहे हैं।

 गोठ बात के बाद सोझ बात

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिन जिन जिलों में पहुंच रहे हैं उन जिलों के अफसरों की सांसें फूलने लगी हैं। कहने को तो वो गांव में रुक रुक कर लोगों से भेंट मुलाकात कर रहे हैं पर इसके पीछे सीएम जिलों के अफसरों के कामों का फीडबैक भी लेते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रालय के अफसरों की टीम भी इसकी मानिटरिंग कर रही है। यानि कुछ के नंबर बढ़ गए हैं तो कुछ बाई ग्रेस सीएम की परीक्षा में पास होने के लिए रायपुर में अपने संपर्क सूत्रों की तलाश में लग गए हैं। लेकिन जो अफसर दफ्तर के एयर​कंडिशन आफिस में बैठ कर अफसरशाही की मलाई उड़ाते रहे उनके चेहरों पर बरसात में भी पसीना आ रहा है। सभी को अंदाजा हो गया है कि अगले महीने यानि विधानसभा के मानूसन सत्र से पहले सीएम ‘भेंट मुलाकात’ में मिले फीड बैक के आधार पर अफसरों से गोठ बात के बाद सोझ बात करने वाले हैं वो इसकी तैयारी कर लें।

 0.खाद और खाज

छत्तीसगढ़ में मानसून कभी रूठ रहा है तो कभी हंसा रहा है। मगर किसान की हालत जस की तस है। वो न तो रूठ रहा ना ही हंस रहा है वो बस अपना सर खुजा रहा है। किसान ये समझ नहीं पा रहा है कि किसानी के समय में मानसून कब दगा दे जाए कुछ पता नहीं मगर अगर खेत में डालने वाले खाद ने दगा दे दिया तो फिर सर खुजाने से भी काम नहीं चलेगा। प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने बार बार …खाद खाद खाद बोल कर किसानों को भरमा दिया है। कांग्रेस के मंत्री जहां खाद की कमी का रोना रो रहे हैं तो भाजपा वाले इसे प्रदेश सरकार की नाकामी बता रहे हैं। मगर किसान पूछ रहा है माई बाप हमर खाद ला कोन खा गइस….! सोसयटी में लाइन लगाते किसानों के बदन में खाज उठने लगी है। अगर समय पर किसानों को खाद नहीं मिला तो किसान सर खुजाने के बजाए सरकार को खुजा बैठे तो फिर…….

         ✍️ अनिल द्विवेदी,ईश्वर चन्द्रा