महाराष्ट्र की राजनीति में अगले 48 घंटे बेहद अहम, गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी ले सकते हैं ये बड़ा फैसला

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न्यूज डेस्क। महाराष्ट्र में शिवसेना (Shiv Sena) के विधायकों सीएम ठाकरे के खिलाफ बगावत का अंजाम क्या होगा, यह तो अभी भविष्य के गर्त में है. लेकिन राज्य की सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के लिए अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी सियासी हालात का खुद संज्ञान लेते हुए फ्लोर टेस्ट कराने का फैसला ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो MVA सरकार गिर सकती है.

एकनाथ शिंदे आ सकते हैं मुंबई

माना जा रहा है कि राज्य में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) आज या फिर कल मुंबई आ सकते हैं. इसके साथ ही वे गवर्नर को मिलकर 39 विधायकों का सरकार से सपोर्ट वापस लेने का पत्र सौंप सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि अभी तक पूरे मसले पर चुप्पी साधे बैठी बीजेपी एकनाथ शिंदे के इस कदम के बाद ही अपना रुख साफ करेगी. इसी बीच बीजेपी ने अपने विधायको को मुंबई आने के लिए तैयार रहने के भी संकेत दिए हैं.

आज मुंबई में बीजेपी नेताओं की होगी बैठक

राज्य में सरकार गठन के मुद्दे पर आज पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के घर पर BJP के तमाम कद्दावर नेताओ की मीटिंग होने वाली है. इस बैठक में एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और उनके समर्थक विधायकों को साथ लेकर सरकार बनाने की तैयारी है. अगर ऐसा होता है तो शिवसेना आक्रामक रूप अपना सकती है और राज्य में अपने विरोध प्रदर्शनों को तीखा कर सकती है. इस बीच महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार अपने दिल्ली दौरे से वापस राज्य में लौट चुके हैं.

बागी विधायकों पर भड़के आदित्य ठाकरे

अपनी पार्टी के विधायकों की बगावत से नाराज सीएम उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य के कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) खूब भड़के. बागी विधायकों के प्रति अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, ‘नालायक, बगावत करनेवाले विधायको ने सीएम को अकेला छोड़ दिया. अच्छा हुआ, जो गंदगी चली गई. जिनको राजनीति समझ में नहीं आती है, वो भी कहते हैं कि गलत हो रहा है. ये आवाज गुवाहाटी तक पहुंच रही है. हमें कई लोगों ने कहा था कि इन्हें रिपीट न करें, फिर भी हमने इन्हें चुनाव में खड़ा किया.’

‘अपने लोग ही गद्दार निकले’

आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, ‘अपने लोग ही गद्दार निकले. बगावत के लिए उन्हें सूरत जाना पड़ा. कोई रिक्शा चला रहा था और कोई पान की टपरी लगा रहा था. हमने उन्हें विधायक बना दिया. फिर भी उन्होंने हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया. अगर हिम्मत है तो आ जाओ. अपने पदों से रिजाइन करके फिर से चुनाव लड़ो. शिवसैनिक तुम्हें हराने के लिए तैयार खड़े मिलेंगे.’

‘शिवसेना कार्यकर्ताओं से बनी है’

शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि विधायक मतलब शिवसेना नहीं होता. शिवसेना कार्यकर्ताओं से है. हम उन्हीं के वोटों से जीत के आते हैं. जो नेशनल एग्जीक्यूटिव की मीटिंग हुई थी. उसमें यह कहा गया था कि बाला साहब ठाकरे और शिवसेना का नाम कोई भी दल या व्यक्ति इस्तेमाल नहीं कर सकता. उद्धव ठाकरे कुर्सी के लोभी नहीं है.इसी के लिए उन्होंने सरकार बंगला छोड़ दिया और अपने निजी आवास में चले गए.