गिरफ्तारी, कुर्की, तलाशी… ED के सबसे बड़े हथ‍ियार मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट के बारे में जानिए सबकुछ

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नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (PMLA) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला एक्‍ट के प्रावधानों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मिली शक्तियों से जुड़ा है। कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (Money Laundering Act) के इन प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस तरह सर्वोच्‍च न्‍यायालय (Supreme Court) ने एक्‍ट के तहत ईडी की गिरफ्तारी, तलाशी और जब्‍ती से जुड़ी शक्तियों को कायम रखा है। कोर्ट ने साफ कहा है कि गिरफ्तारी के लिए ईडी को आधार बताना जरूरी नहीं है। इस आदेश को उन लोगों के लिए झटका माना जा रहा है जिन पर एजेंसी की जांच की तलवार लटकी हुई है। कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ कर रही है। मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने की मंशा से यह कानून बनाया गया था। इसके तहत कई नामचीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आइए, यहां इस कानून के बारे में जानते हैं। साथ ही यह भी समझते हैं कि किन सेक्‍शंस के तहत ईडी को ‘सुपरपावर’ मिली हुई है।

मनी लॉन्ड्रिंग क‍िसे कहते हैं?
सरल शब्‍दों में मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब पैसों की हेराफेरी है। यह अवैध तरीके से कमाई गई काली कमाई को वाइट मनी में बदलने की तरकीब है। हाल में मनी लॉन्ड्रिंग शब्‍द बार-बार आता रहा है। देश में मनी लॉन्ड्रिंग को हवाला लेनदेन के तौर पर जाना जाता है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो मनी लॉन्ड्रिंग अवैध कमाई को छुपाने का तरीका है। इसके जरिये पैसों को इस तरह निवेश किया जाता है कि जांच एजेंसियों को स्रोत का पता न लग पाए। जो व्‍यक्ति पैसों की हेराफेरी करता है उसे लॉउन्‍डरर (Laundrer) कहते हैं। इसके जरिये काली कमाई सफेद होकर वापस असली मालिक के पास लौट आती है। इसके कई तरीके हो सकते हैं। इनमें से एक तरीका फर्जी या शेल कंपनी बनाना है। इन शेल या मुखौटा कंपनियों का अस्तित्‍व केवल कागजों में होता है। इन कंपनियों के जरिये ब्‍लैक मनी को वाइट में बदलने का खेल खेला जाता है। एक तरीका विदेश में ऐसे पैसे को जमा कराना है। यह पैसा ऐसे खातों में जमा कराया जाता है जहां जांच का अधिकार दूसरे देश की सरकार को न हो।