DMF से कृषि उपकरणों की खरीदी की जांच शुरू, कृषि संचालक पर गिरी गाज, ,सीएम की सख्ती के बाद हटाए गए

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रायपुर/कोरबा। डीएमएफ फंड से कृषि उपकरण की खरीदारी का मामला विधानसभा में गूंजने के बाद मामले की जांच शरु हो गई है। जांच से पहले
छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि संचालक को पद से हटा दिया है। बता दें कि राज्य के सात डीएमएफ जिलों जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सरगुजा और बस्तर संभाग में बिना तय सरकारी दर के ही कृषि उपकरणों व अन्य चीजों की खरीदारी हुई है।

अफसरों ने बिना किसी मूल्य निर्धारण के बाजार दर से ज्यादा कीमत पर कृषि उपकरणों की खरीदारी की है। इसे लेकर विधानसभा में भी हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं इस मामले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का घोषणा की थी। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि डीएमएफ के खर्चो का परीक्षण चल रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता पर जिम्मेदार अफसरों को बख्शा नहीं जाएगा।

जानें क्या है पूरा मामला

छत्‍तीसगढ़ के कई जिलों में पिछले चार वर्षों में आटा चक्की से लेकर तेल मिल, मिनी दाल मिल, राइस मिल, सीड ट्रिटिंग ड्रम, पैडी वीडर, हैंड नैपसेक, बैटरी चलित नैपसेक यंत्र आदि उपकरणों की खरीदी हुई है। इस पर अफसरों ने 200 करोड़ रुपये फूंक दिए हैं। किसानों की मांग के बिना खरीदी कर ली गई। विभागीय गोदामों में दाल, तेल, राइस की मिनी प्रोसेसिंग मशीनें, खासकर मिनी आटा चक्की कंडम हो गई हैं।

क्या है सरकारी खरीदी के नियम

नियमानुसार किसी भी खरीदी के लिए रेट कांट्रेक्ट का होना जरूरी है। जैसे अन्य सभी मामलों में प्रत्येक उपकरण का रेट निर्धारण छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (सीएसआइडीसी) से होता है, यहां खरीदी छत्तीसगढ़ कृषि-मशीनीकरण और सूक्ष्म सिंचाई निगरानी प्रक्रिया प्रणाली (चैम्स) में प्रस्ताव दे रहे सप्लायरों के मन मुताबिक कीमत पर हुई है।

चैम्स पोर्टल किसानों की जानकारी के लिए है, लेकिन अफसरों ने इसी को आधार मानते हुए सरकारी खरीदी कर ली। सरकार को खरीदारी करने के लिए रेट निर्धारित करना होता है, जिसके लिए सीएसआइडीसी या फिर जेम्स आदि के माध्यम से रेट कांट्रेक्ट होता है।