Saturday, March 7, 2026
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KORBA: कागजों में विकास की लकीर खींचने वालों से जनता नाराज, प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर में रोडा अटकने की कोशिश

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कोरबा। कोरबा नगर निगम में विकास की योजनाएं जनता को दरकिनार कर नेताओं ने अपने नफा नुकसान को देखकर बनाई, जिनका खामियाजा आज शहर की जनता भुगत रही है।

यह कहना है कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष सुरेंद्र जायसवाल का। उन्होंने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर रहे जोगेश लाम्बा कोरबा के विकास को ऊंचाईयों तक पहंुचाने का वादा करते हुए शहरवासियों को 4 बड़ी परियोजनाओं की सौगात देने का भरोसा दिलाए थे लेकिन कोरबावासी उन बृहद् परियोजनाओं को धरातल पर आज भी खोज रहे हैं।

0.कागजों तक ही सीमित रह गई सभी योजना

पूर्व महापौर ने जिन प्रमुख परियोजनाओं को साकार करने का आश्वासन दिया गया था उनमें सबसे पहली परियोजना सीएसईबी चौक, ट्रांसपोर्ट नगर स्थित स्टोर को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप योजना के तहत वाणिज्यिक परिसर के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव अक्टूबर 2011 में निगम के एमआईसी सदस्यों की बैठक में स्वीकृत किया गया था लेकिन यह परियोजना केवल कागज तक ही सीमित रह गई।

0.एमआईसी का प्रस्ताव भी रद्दी की टोकरी में

उनके कार्यकाल में कोरबा में निरंतर बढ़ रही आवासीय जरूरतों को पूरा करने की दृष्टि से साकेत भवन के सामने पुराने कोर्ट परिसर में बहुमंजिला हाऊसिंग प्रोजेक्ट के लिए हुडको की वित्तीय सहायता से क्रियान्वयन कराए जाने के लिए प्रस्ताव अक्टूबर 2011 में निगम के एमआईसी सदस्यों की बैठक में स्वीकृत किया गया था लेकिन, यह परियोजना भी केवल कागज तक ही सीमित रह गई।

एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना के प्रस्ताव को एमआईसी की मई, 2012 में हुई बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई थी जिसके तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप योजना के तहत कोरबा कोतवाली परिसर को पूर्ण रूप से विकसित किया जाना था, लेकिन यह परियोजना भी मात्र फाईलों तक ही सीमित रह गई।

0.नाकामियों की लंबी लिस्ट

पूर्व महापौर जोगेश लाम्बा के कार्यकाल में प्रोजेक्ट दर्री बरॉज में कोरबा वासियों के लिए बोटिंग क्लब, चौपाटी एवं मनोरंजन उद्यान बनाए जाने की योजना के प्रस्ताव को अक्टूबर 2012 में हुई एमआईसी सदस्यों की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया था अब इस परियोजना का कहीं अतापता नहीं है। ये चारों परियोजनाएं कोरबावासियों के हित में मील का पत्थर साबित हो सकती थीं, लेकिन लाम्बा ने अपने कार्यकाल में एक भी परियोजना को अमलीजामा नहीं पहना सके।

0.तालाब कब्जे में गुम गया, फार्म हाउस खड़ा है

इसके अलावा लाम्बा ने महापौर रहते हुए उपर्युक्त परियोजनाओं को डकारने के साथ ही मोतीसागर पारा का तालाब और लक्ष्मण बन तालाब दोनों के ऊपर कब्जा जमा लिया। जिसकी वजह से बस्तीवासियों की निस्तारी बाधित हो गई। इसी तरह से महापौर रहते हुए इमलीडुग्गू में लगभग सवा एकड़ शासकीय जमीन पर बना फार्म हाऊस चर्चा में बना हुआ है।

0.अब ट्रांसपोर्ट में हो रही सियासत

शहर में इस बात की चर्चा है कोरबा शहर की जनता चाहती है कि कोरबा शहर के मध्य से ट्रांसपोर्ट नगर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए। वहीं कुछ लोग अपने स्वार्थ पूरा करने इसे लटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों की दुकानें ट्रांसपोर्ट नगर वर्तमान में जहां संचालित हैं वो चाहते हैं कि ट्रांसपोर्ट नगर वहीं रहे ताकि उनकी दुकान एवं गैरेज भी यथावत चलता रहे।

0.समाज की जमीन पर भी कब्जा

बताया जा रहा है कि पंजाबी समाज का भवन बनाने के लिए चिन्हित की गई जमीन पर खुद पूर्व महापौर ने कब्जा जमा लिया है। सम्भवतः यही सब कारण है कि जब समय आने पर 2013 के महापौर रहते हुए वो विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी तो बने लेकिन, कोरबा की जनता ने उनकी करतूतों का प्रतिफल चुनाव में करारी हार देकर अपना जवाब दे दिया। समाज की नाराजगी उन्हें भारी पड़ी।