रैली निकालकर पैदल कलेक्टोरेट पहुंचे थे 15 गांव के ग्रामीण, दस दिनों का अल्टीमेटम दिया, नहीं तो होगी खदानबंदी
कोरबा। कोयले की चमक से जहां सारा देश रोशन हो रहा है, खदानों के लिए अपने घर और खेतीहर जमीनें देकर भी स्थानीय लोग आज भी बदहाल हैं। उनकी समस्याओं का अंत वर्षों बाद भी नहीं हो सका। अपनी पीड़ा शासन तक पहुंचाने शुक्रवार को भूविस्थापित बड़ी संख्या में प्रशासन के द्वार पहुंचे थे। तपती धूप में तख्तियां थामें पैदल शहर तक यात्रा की और अपनी जमीनों के बदले नौकरी, पुनर्वास, मुआवजा और मूलभूत जरूरतों की मांग रखी गई।
रोजगार, बसाहट और मुआवजा से जुड़ी समस्या को लेकर 15 कई गाव के भू विस्थापित एसईसीएल से नाराज है। लम्बा समय बीतने पर भी उनकी समस्या यथावत है। विस्थापित समुदाय ने भरी गर्मी में रैली निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसमे कहा गया है कि 10 दिन के भीतर मसला हल नही किया गया तो वे कुसमुंडा खदान को बंद करने के लिए बाध्य होंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और प्रबंधन की होगी।














