कोरबा। लेमरू रेंज में हरे भरे जंगल पर ईंट भट्ठा संचालकों की नजर लग गई है। इस क्षेत्र और पर्यावरण के लिए संजीवनी समान लामपहाड़ के आस पास पेड़ों की बेतहाशा कटाई की जा रही है। लामपहाड़ से सुर्वे जाने वाले रास्ते पर ईट भट्ठा मालिकों द्वारा संचालित भट्टा के लिए सैकड़ों पेड़ों का अंधाधुंध सफाया किया जा रहा है। जंगल की सुरक्षा को लेकर वन अमले के उपेक्षित रवैया के चलते इन अवैध कारोबारियों के इरादे बुलंद हैं। पर नुकसान प्रकृति और वन्य जीवों का हो रहा है।
हरियाली पर तस्करों और अवैध ईंट भट्ठा संचालकों की बुरी नजर लग गई है। साल, सागौन, चार, कोसम, सेनहा, महुआ जैसे पेड़ों से भरे जंगल में पेड़ कटाई का मामला लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा में ढील होने से बेतहाशा कटाई से हरियाली कम होती जा रही है। जिस तरह से पेड़ों की लगातार की अंधाधुंध कटाई हो रही है, उससे विभागीय कर्मियों के सांठ-गांठ होने पर बल मिल रहा है। रातोंरात हो रही पेड़ों की अवैध कटाई के ठूंठ गवाह साबित बन रहे हैं। लगातार कट रहे पेड़ों के चलते हालिया स्थिति यह है कि कुछ माह के भीतर बड़े क्षेत्रफल में लगे पेड़ों की जगह अब केवल मैदान और ठूंठ ही नजर आ रहा है। कटे हुए पेड़ों की जगह कब्जा बढ़ रहा है। सैकड़ों की संख्या में काट लिए गए पेड़ों की लकड़ियों की जगह अवैध ईंट भट्ठा संचालित करने की तैयारी की जा रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर लकड़ियों की अवैध कटाई पिछले कुछ दिनों से बढ़ गई है। कार्रवाई नहीं होने के कारण रात के समय वाहनों का जंगल से आवागमन जारी रहता है।
जंगल में ग्रामीणों का आवागमन कम होने का लाभ उठाते हुए कटाई की गई है। पेड़ों की इस तरह से कटाई की गई है, जिससे सघन जंगल के भीतर वाहनों का प्रवेश करने का रास्ता बन जाए। अवैध तरीके से बनाए गए मार्ग से मिट्टी उत्खनन का परिवहन हो रहा है। काटे गए पेड़ों में नर्सरी के भी प़ेड शामिल हैं, जिसे वन समितियों ने पांच साल पहले लगाया था। पेड़ों की कटाई से वन भूमि मैदान में तब्दील हो रही है। पेड़ों की जिस तरह से कटाई की जा रही है, उससे पर्यावरण का विनाश हो रहा है। इस तरह बेरोकटोक कटाई होने से वन विभाग के मैदानी अमले की मौन स्वीकृति महसूस की जा सकती है।















