The Duniyadari:रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल और जिला खनिज (DMF) फंड से जुड़े कथित घोटाले में अब जांच प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ताजा घटनाक्रम में आरोपी के बयान दर्ज करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठे हैं, जिससे पूरे प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र में हलचल मच गई है।
सूत्रों के अनुसार, मामले के प्रमुख आरोपी निखिल चंद्राकर का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत बयान न्यायालय में दर्ज होना था। लेकिन सामने आए कुछ दस्तावेजों से संकेत मिलते हैं कि यह बयान अदालत कक्ष के बजाय किसी निजी कंप्यूटर पर तैयार किया गया। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है, क्योंकि नियमों के मुताबिक ऐसा बयान न्यायिक अधिकारी की उपस्थिति में अदालत परिसर में ही दर्ज होना चाहिए।
मामले में कथित अनियमितता उजागर होने के बाद बचाव पक्ष ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रुख किया है। याचिका में जांच एजेंसी पर न्यायालय को गुमराह करने और जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी ने इसे साधारण तकनीकी त्रुटि मानने से इनकार करते हुए पूरे घटनाक्रम की फॉरेंसिक जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बयान कहां और किसके निर्देश पर तैयार किया गया।
इस प्रकरण में एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक शिकायत भी दर्ज की गई है। आरोप है कि बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया उनकी निगरानी में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से 25 अक्टूबर 2025 तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। साथ ही संकेत दिया गया है कि यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
घटना सामने आने के बाद Economic Offences Wing और Anti-Corruption Bureau के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। सतर्कता एजेंसियों ने मामले पर नजर रखनी शुरू कर दी है और राज्य सरकार भी विस्तृत रिपोर्ट मांगने की तैयारी में है।
अब सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह आने वाला समय ही तय करेगा कि मामला सिर्फ लापरवाही का है या इसके पीछे किसी बड़े खेल की परतें छिपी हैं। फिलहाल, इस विवाद ने राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में एक नया मोड़ ला दिया है।
































