Tuesday, February 27, 2024
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मार्कफेड के पूर्व एमडी और कोरबा समेत प्रदेश के राइस मिलरों पर कसेगा ED का शिकंजा.. सता रहा गिरफ्तारी का डर…

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कस्टम मिलिंग चावल घोटाले की जांच तेज कर दी है। 175 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपित छत्तीसगढ़ राज्य विपणन संघ लिमिटेड (मार्कफेड) के पूर्व एमडी मनोज सोनी, पूर्व विपणन अधिकारी पूजा केरकेट्टा समेत छह राइस मिलरों पर कानून का शिकंजा कसने की तैयारी है।

ईडी के रडार में आए सभी लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। ईडी को जांच के दौरान मार्कफेड दफ्तर और राइस मिलरों से 1.06 करोड़ रुपये नकद और वसूली करने से संबंधित दस्तावेज मिले थे। रुपये का हिसाब नहीं देने पर जब्त किया गया है। दस्तावेजों की जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर वसूली के खेल में शामिल सिंडीकेट की भी गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। जांच के घेरे में आए अधिकारी-कर्मचारी और राइस मिलरों को गिरफ्तारी का डर सताने लगा है।

कई अधिकारी-कर्मचारी और राइस मिलर ईडी की रडार में

ईडी ने दावा किया कि मार्कफेड के एक पूर्व प्रबंध निदेशक और स्थानीय राइस मिलर्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने ताकतवर लोगों के लिए 175 करोड़ रुपये की रिश्वत ली। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ईडी ने राज्य में कोयला लेवी, शराब घोटाले के साथ महादेव एप सट्टेबाजी मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी की है। वहीं कई रडार पर हैं।

उक्त मामलों में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से जुड़े स्थानीय राजनेताओं और नौकरशाहों पर साठगांठ कर करोड़ों रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। एजेंसी ने अब तक इन मामलों में दो आइएएस अधिकारियों, एक राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, कुछ पुलिस कर्मचारियों, कारोबारियों को गिरफ्तार किया है।

घोटाला में बेहिसाबी 1.06 करोड़ रुपये बरामद
इधर, कस्टम राइस मिलिंग विशेष प्रोत्साहन घोटाला में ईडी का आरोप है कि 20 और 21 अक्टूबर 2022 को मार्कफेड के पूर्व प्रबंध निदेशक मनोज सोनी, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर और पदाधिकारियों, जिला विपणन अधिकारियों और कुछ अन्य के ठिकानों की तलाशी में विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और बेहिसाबी 1.06 करोड़ रुपये बरामद किए गए।

विशेष भत्ता 40 से बढ़ाकर 120 रुपये किया ईडी ने जांच में पाया है कि छत्तीसगढ़ राज्य राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मार्कफेड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत की और मिलिंग में विशेष प्रोत्साहन राशि का दुरुपयोग करने व रिश्वत में करोड़ों रुपये कमाने की साजिश रची।

जांच में यह भी सामने आया है कि धान की मिलिंग में विशेष भत्ता 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल करने के बाद 500 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया गया, जिससे 175 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली। इसे रोशन चंद्राकर ने मार्कफेड के एमडी की सक्रिय सहायता से एकत्र किया था।

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