Sunday, March 8, 2026
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Korba: सीआईएसएफ की ड्यूटी के बाद भी धड़ल्ले से घुस रहे लोग.. ट्रक की चपेट में आकर बेवजह हो गई एक निर्दोष की मौत…

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0 एसईसीएल दीपका खदान में 25 नंबर तौल नाके की घटना, मार्ग किनारे खराब हो गए अपने वाहन को सुधार कर रहा था मृतक

कोरबा। एसईसीएल की दीपका खदान में तौल नाके पास ही सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। उसे किसी ऐसे ही अनाधिकृत घुस आने वाले वाहन ने कुचल दिया। पर सवाल यह उठता है कि जब खदान के प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी अनाधिकृत व्यक्ति या वाहन की घुसपैठ हो रही थी, तो उस वक्त सीआईएसएफ के जवान आखिर कौन सी ड्यूटी कर रहे थे। खदान एरिया की सुरक्षा और चौकसी की जिम्मेदारी सीआईएसएफ की है। पर इस तरह से बेधड़क या बिना रोक-टोल अनाधिकृत व्यक्तियों या वाहनों के प्रवेश पर मूक दर्शक बने बैठे उस वक्त ड्यूटी पर रहे सीआईएसएफ कर्मियों को भी इस दुर्घटना और व्यक्ति की बेवक्त मौत का जिम्मेदार ठहराया जाए, तो गलत न होगा।

 

हादसे में मौत की यह घटना एसईसीएल दीपका खदान अंतर्गत 25 नंबर कांटा के पास ही है। हादसा उस समय हुआ, जब मृतक एक स्थान पर मार्ग किनारे खराब होकर खड़ी हो गई अपनी बाइक को ठीक करने के प्रयास में जुटा था। उसे क्या पता था कि अचानक खराब होकर खड़ी हो गई बाइक को एक किनारे पर ठीक करने की उसकी जुगत में आज उसकी जान चली जाएगी। मृतक खदान क्षेत्र में संचालित कंपनी एफआईएलएल का कर्मचारी था। इस हादसे के पीछे किसी ऐसे वाहन का अनियंत्रित होना बताया जा रहा है, जिसकी घुसपैठ खदान के प्रतिबंधित क्षेत्र में अनाधिकृत तौर पर हुई थी। ऐसे किसी अनाधिकृत प्रवेश पर कड़ी नजर रखते हुए खदान में कार्य कर रहे कर्मियों और पड़ी भारत सरकार अथवा देश की सार्वजनिक संपत्ति की हर हाल में सुरक्षा सुनिश्चित करने की जवाबदारी केंद्र शासन ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंप रखी है। बावजूद इसके इस तरह अनाधिकृत वाहन का घुस आना और खदान क्षेत्र में कार्य के लिए आए एक कर्मी को कुचलकर निकल जाना, निश्चित तौर पर एक बड़ी लापरवाही का सूचक है। इस घटना के लिए जहां दुर्घटनाकारित वाहन जितनी जिम्मेदार है, घटना के वक्त उस क्षेत्र में ड्यूटी दे रहे सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों को भी उतना ही जवाबदार माना जाना चाहिए। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से भी यह सवाल पूछा जाना लाजमी होगा कि जब वह दुर्घटनाकारित वाहन खदान के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस आया था, तो आखिर वे कौन सी ड्यूटी में व्यस्त रहे, जो उन्हें वह दिखाई नहीं पड़ा। अगर दिखाई पड़ा था, तो उन्होंने जांच कर पूछताछ क्यों नहंी की? अगर अनाधिकृत प्रवेश था, तो उसे प्रतिबंधित क्षेत्र में इस तरह घुसपैठ करने से क्यों नहीं रोका गया? अनाधिकृत लोक जब घुस आते हैं तो उनकी जांच करने की बजाय मूक दर्शक बन एक जगह पर बैठे रहना ही उनकी ड्यूटी है? इस घटना की सूचना संबंधित कंपनी व एसईसीएल के अफसरों समेत परिजनों को दी दे दी गई है।