कोरबा। कांग्रेस का झंडा लेकर कोरबा को एक अभेद किले में रूपांतरित कर देने वाले मंत्री जयसिंह को यूं ही कद्दावर की संज्ञा नहीं दी जाती। उनकी कुशल रणनीति का एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला, जब तीन अभ्यर्थियों ने जयसिंह को मैदान सौंपकर चुनावी समर से किनारा कर लिया और अपने नाम वापस ले लिए। इतना ही नहीं, भाजपा के हमनाम पर निर्दलीय अभ्यर्थी लखन को ढूंढ निकलने की तमाम कोशिशें भी नाकाम रही। भाजपाई रणनीतिकार यहां भी कांग्रेस उम्मीदवार के छद्म में उलझकर मात खा गए।
विधानसभा चुनाव 2023 का महासमर अब रोमांचक करवट लेने लगा है। साम दाम और दंड भेद की इस बिसात में शामिल होने का दंभ भरने वालेंतीन अभ्यर्थियों ने जयसिंह अग्रवाल का समर्थन करते हुए नाम वापस ले लिया है। उधर भाजपा उम्मीदवार लखनलाल देवांगन के नाम का छद्म यानी लखन पार्ट टू की भाजपाइयों की खोज भी अधूरी रह गई। आखिरकार अब भाजपा-कांग्रेस से पहले खुद लखनलाल देवांगन अपने हमनाम उम्मीदवार लखन से भिड़ने की चुनौती से लड़ने को विवश हो गए। विधानसभा चुनाव के लिए नाम वापसी के अंतिम दिन तीन अभ्यर्थियों ने जयसिंह अग्रवाल के समर्थन में नाम वापस करते हुए कांग्रेस पर भरोसा जताया है। वही भाजपा प्रत्याशी लखन लाल देवांगन के हमनाम अभ्यर्थी की दिन भर तलाश करते रहे लेकिन उनकी तलाश नही कर पाए। पार्टी के फर्माबरदार रणनीति के दम का डंका बजाते रह गए। पर बड़ी बड़ी बाते सिर्फ बातें बनकर रह जाती हैं और जिनकी रणनीति सटीक होती है, वही चुनावी रण में विजयी कहलाता है। बात अगर कोरबा विधानसभा की जाए तो तीन बार के विधायक जयसिंह अग्रवाल रणनीति के दम पर राज करते रहे हैं। उनकी मौजूदा रणनीति पर गौर करें तो रज्जाक अली, जो 15 दिन पहले घूम घूम कर मंत्री की बुराई कर रहे थे, वो नाम वापसी तक नतमस्तक नजर आए। यही नहीं, चुनाव में भाजपा के हमनाम अभ्यर्थी लखन देवांगन को निर्दलीय मैदान उतार कर वोटरों को उलझा दिया। लखन देवांगन को नाम वापस कराने भाजपा के रणनीतिकार और उनके सिपहसालार दो दिनों से ढूंढते रहे। बाउजूद इसके लखन को ढूंढने में कामयाब नही हो सके।































