Tuesday, February 27, 2024
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DSPM प्लांट के सायलो से लोड करना था राख.. EE की मेहरबानी, गोढ़ी ऐश डेम से राख उठाकर ठेकेदार कर रहे मनमानी…

0 भरना है खदान पर यहां तो सड़क पर फेंकने का कारोबार

0 डीएसपीएम सायलो से मानिकपुर का ठेका लेकिन गोढ़ी से उठाया जा रहा राखड़

कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के डीएसपीएम पॉवर प्लांट से उत्सर्जित राख को सायलो से लोड करने का ठेका लेकर ट्रांसपोर्टर गोढ़ी ऐश डेम से राख उठा रहे है। ईई की मेहरबानी से ठेकेदार की मनमानी से कंपनी को करोड़ों का चपत लग रहा है।

मामला राख से रकम बढ़ाने का है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के उत्सर्जित राख अफसर और ट्रांसपोर्टर के लिए किसी कोकीन से कम नही है। फर्क बस इतना है कि कोकीन की बिक्री प्रतिबंधित है और राख परिवहन शहर के धनपतियों का प्रमुख कारोबार है। राख के इस खेल में सीएसईबी के अफसर और ठेकेदार लाल है। ये बात अलग है कि शहर के जनमानस का जगह जगह राख डंपिंग से हाल बेहाल है। सफेद पाऊडर यानी राख का सबाब पर है कि हर राजनेता इसमें डूबना चाहता है। राख परिवहन से रकम बढ़ाने का ताजा मामला गोढ़ी ऐश डेम का है। ट्रांसपोर्टर राख उठाने सायलो का ठेका लिया है लेकिन गोढ़ी राखड डेम से रहा है। ये खेल बाकायदा ईई के सुपर विजन में हो रहा है। फायदे के लिए कायदे को भुलाकर कर ट्रांसपोर्टर को लाभ देने का खेल पूरे शबाब पर है।

 

लाभ को दोगुना करने का धंधा है चोखा

 

पर्यावरण के लिए मुसीबत बन रहे राखड़ के उचित निपटान के साथ खोखली जमीन को भरने के दोहरे लाभ के बीच कुछ खास लोग अपना अलग धंधा चोखा करने में लगे हैं। बात बिजली संयंत्र की चल रही है, जिसके डीएसपीएम सायलो से राखड़ उठाकर परिवहन का ठेका दिया गया है। अनुबंध के अनुसार इस साइलो से राखड उठाकर उसे मानिकपुर खुली खदान में डंप करना है, ताकि उसमें राख भरकर खोखली होती जमीन के आधार को एक ओर धीरे धीरे मजबूत करने की कोशिश की जा सके तो दूसरी ओर रखड़ के प्रदूषण की विकराल समस्या को नियंत्रित किया जा सके। पर अनुबंध के विपरीत ठेकेदार अपनी बचत के लिए एसडीपीएम की बजाय गोढ़ी से राख उठा रहा है।

डीएसपीएम से उठाना है राख, बिना रिवाइज के उठा रहे गोढ़ी ऐश डेम से

 

 

राख परिवहन के अनुबंध में डीएमपीएम साइलो से मानिकपुर का ठेका है, लेकिन गोढ़ी से उठाकर राखड़ को जहां तहां सड़क पर डंप किया जा रहा है। इससे एक और नियम और एग्रीमेंट का उल्लंघन किया जा रहा तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की इस कवायद को प्रदूषण फैलाने का किफायती खेल बना लिया गया है।

प्रतिट्रिप 1200 की बचत, शासन को चपत

इस परिवहन ठेके में मानिकपुर माइंस में डंप करने का एग्रीमेंट है पर साइलो की बजाय गोढ़ी से राख उठाया जा रहा है और मानिकपुर की बजाय सड़कों फेंक रहे हैं। इस तरह गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न करने के साथ ठेकेदार बचत कर अपनी जेब तो भर रहे हैं पर इस तरह शासन को भी चपत लगाई जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि इस परिवहन ठेके में कार्यपालन अभियंता भी पार्टनर हैं। यानी जिनके जिम्मे इस तरह की मनमानी और गड़बड़ी को रोकने का जिम्मा है, उन्हीं की शह पर ही यह चोखा गोरख कारोबार बेधड़क संचालित किया जा रहा है।

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