Saturday, March 28, 2026
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Korba: अहिरन नदी का रेत और हसदेव की रायल्टी.. तस्करों पर कार्रवाई में फूल रहे प्रशासन के हाथ पांव,VIDEO..

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कोरबा। शहर में रेत खदान बंद होने के बाद भी रेत तस्कर अहिरन नदी से रेत उत्खनन कर हसदेव नदी जांजगीर केराकछार की रायल्टी लेकर ऊंचे दाम पर बेच रहे है। रेत तस्करी के समाचारों के बाद भी कार्रवाई में प्रशासन के हाथ पांव कांप रहे है।

 

बता दें कि पूरे शहर में रेत ट्रैक्टर से रेत परिवहन बंद करने के आदेश बाद बरमपुर के रेत तस्करों की बल्ले-बल्ले हो गई है। रेत तस्करों ने तस्करी की नई युक्ति खोज ली है, जिससे लोगो को रायल्टी दिखाकर धौंस दिखा सके। सूत्र बतातें हैं कि रेत तस्कर लोगो की आंखों में धूल झोंकने के लिए जांजगीर हसदेव नदी केराकछार रेत घाट की रायल्टी रखकर अहिरन नदी का रेत उत्खनन कर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। रेत माफिया की रेत तस्करी की नई विधि की सूचना वैधानिक-संवैधानिक खनिज विभाग को होने के बाद भी कार्रवाई न होने से रेत परिवहन करने वाले ट्रैक्टर मालिको में रोष व्याप्त है।

ये अंतर है हसदेव नदी और अहिरन के रेत में

 

रेत से जुड़े कारोबारियो की मानें तो जांजगीर के हसदेव नदी केराकछार का रेत सुनहरा रंग लिए चमकदार होता है जबकि अहिरन नदी का रेत मटमैला और कोयला डस्ट मिक्स होता है। दोनों नदी के रेत को देखने मात्र से रेत कि कहां की है इसका अनुभव किया जा सकता है।इसके बाद भी रेत तस्करी पर विराम नही लगा पाना खनिज विभाग की जानबूझकर की जा रही घोर लापरवाही को दर्शाता है।

 

बुधवारी बाजार में रुककर गिनी जा सकती है गाड़ियां

 

कोरबा से केराकछार जांजगीर की दूरी लगभग 40 किमी है इसके बाद भी शहर के भीतर हर दस मिनट में रेत वाहन फर्राटे भरते दिख जाएंगे। बुधवारी बाजार चौक के समीप रुककर गाड़िया गिनकर बताया जा सकता है कि रोज सैकड़ों बार कितने ट्रैक्टर कुलांचे मार रहे हैं।