Friday, March 1, 2024
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अलर्टः ऊंचाई कम, पत्तियां छोटी… भाजी फसलों पर बड़ा खतरा

बिलासपुर- पत्तियां मानक आकार से छोटी होंगी। पौधों की ऊंचाई कम होगी। भाजी उत्पादक किसानों के लिए यह अलर्ट सब्जी वैज्ञानिकों ने जारी करते हुए कहा है कि गर्मी के दिनों में बोई जाने वाली सब्जी फसलों में ऐसी प्रजाति का चयन करें, जिनकी ताप सहन शक्ति मजबूत है।

 

बढ़ते तापमान ने सब्जी फसलों की ओर अपना कदम बढ़ा दिया है। जिस गति से यह फैल रहा है, उसे देखते हुए सब्जी वैज्ञानिकों ने पहला असर भाजी की फसलों पर पड़ने की आशंका जाहिर कर दी है। यह इसलिए क्योंकि तापमान का स्तर जैसा बना हुआ है, वह भाजी फसलों के लिए मानक तापमान से कहीं ज्यादा है। यह कमजोर उत्पादन के रूप में किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है।

होगा पत्तियों का आकार छोटा

खूब आ रही है, मेथी और पालक भाजी। ठीक पीछे, आवक के लिए तैयार हो रही है अमारी भाजी। भाजी की यह तीन प्रजातियां ऐसी हैं, जिनमें ताप सहनशीलता सबसे कम होती है। फिलहाल जो तापमान बन रहा है, वह क्षमता से ज्यादा है। इससे जो प्रभाव पड़ेगा, वह पत्तियों के छोटा होने के रूप में सामने आएगा। संपूर्ण आकार के लिए मानक तापमान 25 डिग्री सेल्सियस माना गया है।

खतरे के करीब

बड़े रकबे में बोई गई है लाल और चौलाई भाजी। बाजार भी साथ दे रहा है लेकिन इन दोनों तक भी बढ़ते तापमान ने दस्तक दे दी है। पत्तियों का आकार छोटा होने और ऊंचाई कम होने की आशंका के बीच इन दोनों की खेती कर रहे किसानों को सतर्क रहना होगा। आगामी खेती के लिए इस क्षेत्र को भी फसल चयन में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लाल और चौलाई भाजी के लिए आदर्श तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस है।

ऊंचाई कम और गांठ छोटी

प्याज की खेती कर रहे किसानों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। दिन और रात का तापमान जैसा बन रहा है, उसके असर से पौधों की ऊंचाई तो कम होगी ही, साथ ही लगने वाली गांठ का आकार भी छोटा होगा। बचाव के लिए फिलहाल कोई उपाय नहीं है। प्याज की खेती के लिए आदर्श तापमान 25 डिग्री सेल्सियस मानी जाती है।

यहां ग्रीन नेट अनिवार्य

पूरी तरह खतरे के बीच जा पहुंची है धनिया की फसल। तैयार होती फसलों को बचाने के लिए ग्रीन नेट का उपयोग फौरन किए जाने की सलाह जारी हुई है। यह तेज होती धूप से बचाव में मददगार बनेगा। गर्म हवाओं से पत्तियां कुम्हलाने ना पाए, इसके लिए दीवार के रूप में यही नेट लगाने होंगे। इसके साथ सिंचाई प्रबंधन पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।

भाजी फसलों के लिए ज्यादा है तापमान

तापमान का जैसा स्तर बना हुआ है, वह भाजी फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसान आवश्यक सुझाव का पालन अवश्य करें।
– डॉ अमित दीक्षित, डीन, कॉलेज आफ हॉर्टिकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, पाटन, दुर्ग

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