Tuesday, July 23, 2024
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छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ FIR..

रायपुर. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है. अब बताया जा रहा है कि ईडी के प्रतिवेदन पर एसीबी/ईओडब्ल्यू ने भूपेश बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है. पूर्व सीएम के खिलाफ 120 बी, 34, 406, 420, 467 समेत कई अनेक धाराओं में मामला दर्ज होने की बात सामने आ रही है. सोशल मीडिया पर एफआईआर की एक कॉपी भी जमकर वायरल हो रही है. हालांकि अभी तक किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) महादेव ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी एप्लिकेशन के कथित अवैध संचालन में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की भी जांच कर रहा है, जिसमें कथित तौर पर छत्तीसगढ़ के उच्च पदस्थ राजनेता और नौकरशाह शामिल हैं।

फरवरी में केंद्रीय एजेंसी ने मामले में नौवीं गिरफ्तारी की। ईडी ने पहले कहा था कि ऐप से आए कथित अवैध धन का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ में राजनेताओं और नौकरशाहों को रिश्वत देने के लिए किया गया था। बॉलीवुड अभिनेताओं सहित कई मशहूर हस्तियों को एजेंसी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और भुगतान के तरीके के साथ उनके संबंधों पर पूछताछ के लिए बुलाया था।

अब तक, ईडी ने दो आरोपपत्र दायर किए हैं, जिनमें कथित अवैध सट्टेबाजी और गेमिंग ऐप के दो मुख्य प्रमोटरों – सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ आरोप पत्र शामिल हैं।

केंद्रीय एजेंसी ने पहले आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि चंद्राकर की शादी फरवरी 2023 में संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमा में हुई थी और इस आयोजन पर लगभग 200 करोड़ रुपये की नकद राशि खर्च की गई थी। इसमें कहा गया है कि चंद्राकर के रिश्तेदारों को भारत से यूएई ले जाने के लिए निजी जेट किराए पर लिए गए थे और शादी में प्रस्तुति देने के लिए मशहूर हस्तियों को भुगतान किया गया था। एजेंसी के अनुसार, मामले में अपराध से अनुमानित आय लगभग 6,000 करोड़ रुपये है।

पिछले साल नवंबर में, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले, ईडी ने दावा किया था कि फोरेंसिक विश्लेषण और असीम दास के बयान से तत्कालीन सीएम भूपेश बघेल की भूमिका पर सवाल उठे थे, बयान के मुताबिक महादेव सट्टेबाजी ऐप प्रमोटरों ने लगभग 508 करोड़ रुपये का भुगतान सीएम को किया था।

बघेल ने इन आरोपों को उनकी छवि “खराब” करने का प्रयास बताया था, जबकि कांग्रेस ने इसे भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र की “प्रतिशोध की राजनीति” का परिणाम बताया था।

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