Friday, October 2, 2026
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आश्विन मास में संभलकर करें खान-पान, करेला से दूरी और गुड़ का सेवन रहेगा हितकारी: डॉ. नागेंद्र शर्मा

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The Duniyadari: कोरबा। आश्विन यानी क्वांर मास की शुरुआत के साथ बदलते मौसम में खान-पान और दिनचर्या को लेकर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। छत्तीसगढ़ के आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के अनुसार इस अवधि में मौसम में होने वाले बदलाव का असर शरीर पर पड़ सकता है, इसलिए आहार-विहार में ऋतु के अनुरूप बदलाव करना जरूरी है। हिंदी पंचांग के अनुसार आश्विन मास 27 सितंबर से शुरू होकर 26 अक्टूबर 2026 तक रहेगा।

डॉ. शर्मा ने बताया कि बारिश का दौर समाप्त होने के बाद आसमान साफ होने लगता है और सूर्य की तपिश बढ़ती है। आयुर्वेद की मान्यता के अनुसार इस समय शरीर में पित्त दोष बढ़ने की संभावना रहती है। इसके चलते पित्त से संबंधित परेशानियों और त्वचा संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में हल्का, सुपाच्य और पित्त को संतुलित रखने वाला भोजन लेना उपयोगी माना गया है।

क्वांर में करेला खाने से बचने की सलाह

आश्विन मास के दौरान करेला नहीं खाने की सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा के मुताबिक इस मौसम में कड़वे और कसैले स्वाद वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। छत्तीसगढ़ में प्रचलित लोक कहावत “क्वांर करेला, कार्तिक महि” भी इसी पारंपरिक मान्यता की ओर संकेत करती है। वहीं इस अवधि में गुड़ का सेवन हितकारी बताया गया है।

इन चीजों को आहार में कर सकते हैं शामिल

आश्विन मास में जौ, ज्वार, चावल, मूंग, मोठ, तुअर, मसूर और चना दाल जैसे खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं। मौसमी फलों में मौसंबी, अनानास, बरसाती तरबूज, सफेद अनार, सीताफल और नारियल को शामिल करने की सलाह दी गई है। सब्जियों में परवल, तोरई, लौकी, कद्दू, पुदीना और चौलाई जैसे विकल्प बताए गए हैं। मसालों में काली मिर्च, हल्दी, जीरा, सूखा धनिया, मीठा नीम, इलायची और सीमित मात्रा में पतली दालचीनी का उपयोग किया जा सकता है।

किन खाद्य पदार्थों से बनाएं दूरी

डॉ. शर्मा के अनुसार इस मौसम में करेला, बाजरा, गेहूं, उड़द और कुलथी दाल का सेवन सीमित रखना चाहिए। इसके अलावा ककड़ी, बैंगन, गाजर, मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक, चुकंदर और अधिक अदरक से भी परहेज की सलाह दी गई है। शकरकंद और पपीता सहित अत्यधिक तेल-मिर्च और मसाले वाले भोजन को भी कम मात्रा में लेने तथा बासी और भारी भोजन से बचने की बात कही गई है।

दिनचर्या में भी रखें सावधानी

आश्विन मास में केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवनशैली पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा के मुताबिक दिन में सोने, जरूरत से ज्यादा भोजन करने और तेज धूप में अधिक समय बिताने से बचना चाहिए। शरीर को मौसम के अनुरूप ढककर रखना और हल्के गुनगुने पानी से स्नान करना भी लाभकारी दिनचर्या का हिस्सा बताया गया है।

आयुर्वेद में ऋतुचर्या यानी मौसम के अनुसार खान-पान और जीवनशैली में बदलाव को स्वस्थ रहने का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। बदलते मौसम में संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या अपनाकर मौसमी परेशानियों से बचाव में मदद मिल सकती है।