The Duniyadari. बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कलेक्टर के अधिकारों की सीमा तय करते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का प्रभार बदलने के आदेश को अवैध करार दिया है। अदालत ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता शुभा दामोदर मिश्रा को उनके मूल पद पर पुनः पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ में हुई। याचिका के अनुसार, शुभा दामोदर मिश्रा को 18 जून 2025 को रायपुर स्थित आदिम जाति विकास विभाग द्वारा गौरेला जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर पदस्थ किया गया था।
बताया गया कि वे जून 2025 से अपने पद पर कार्यरत थीं। इसी दौरान 11 मार्च 2026 को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कलेक्टर ने आदेश जारी कर उन्हें CEO के प्रभार से हटाते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय गौरेला में पदस्थ कर दिया।
इस आदेश को चुनौती देते हुए शुभा मिश्रा ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि 11 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव, आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार शासन द्वारा नियुक्त जनपद पंचायत CEO को हटाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है और इसके लिए राज्य शासन की अनुमति आवश्यक है।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने शुभा दामोदर मिश्रा को पुनः जनपद पंचायत गौरेला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद पर बहाल करने के निर्देश जारी किए।















