Wednesday, May 20, 2026
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जांच में सरपंच-सचिव को मिली राहत, लाखागढ़ पंचायत में गबन की शिकायत सही नहीं पाई गई

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The Duniyadari: महासमुंद जिले की जनपद पंचायत पिथौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत लाखागढ़ में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर लगाए गए आर्थिक अनियमितता और फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि गबन करने के आरोपों की जांच पूरी हो गई है। जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने के बाद संबंधितों को बड़ी राहत मिली है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। टीम में सहायक लेखा परीक्षक दिनेश कुमार दीक्षित, सहायक विकास विस्तार अधिकारी लोकेश और तकनीकी सहायक मनरेगा त्रिलोकीनाथ सिन्हा को शामिल किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गौठान और गोधन न्याय योजना से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरती गई और बिना कार्य कराए मनरेगा मद से 11 हजार 782 रुपए तथा गोबर खरीदी में 12 हजार 654 रुपए खर्च दिखाए गए। कुल 24 हजार 436 रुपए की राशि को वसूली योग्य बताया गया था।

जांच के दौरान सरपंच और सचिव ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उक्त राशि से गौठान परिसर में सामुदायिक पशु आश्रय शेड के अंतर्गत कोटना और वर्मी कम्पोस्ट शेड का निर्माण कराया गया है। इसके बाद जांच टीम और उप अभियंता ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का मूल्यांकन किया।

भौतिक सत्यापन में गौठान परिसर में निर्माण कार्य मौजूद पाया गया। वहीं स्थल पर लगभग 70 क्विंटल से अधिक गोबर भी संग्रहित मिला, जिसकी तौल कर पुष्टि की गई। निरीक्षण के दौरान तीन बड़े ढेरों में गोबर रखा हुआ पाया गया, जिसकी मात्रा करीब तीन ट्रैक्टर ट्रॉली के बराबर बताई गई।

अंतिम जांच प्रतिवेदन में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित राशि से कार्य कराया जाना और उसका भौतिक सत्यापन में मिलना प्रमाणित हुआ है। ऐसे में 24 हजार 436 रुपए की राशि की वसूली का मामला अब नहीं बनता।