Tuesday, March 10, 2026
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मालेगांव ब्लास्ट केस: ‘मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया था’, पूर्व ATS अधिकारी का सनसनीखेज दावा

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The Duniyadari: मालेगांव बम ब्लास्ट केस में पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने सनसनीखेज खुलासा किया है। महबूब मुजावर ने कहा कि हमले को भगवा आतंक दिखाने का आदेश दिया गया था। इतना ही नहीं मामले में आरएसएस चीफ मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) को फंसाने के लिए गंदा खेल खेला गया था।

रिटायर अधिकारी ने कहा, कोई भगवा आतंकवाद नहीं था। सब कुछ फर्जी था। मैंने इसका विरोध किया तो मुझ ही कई केस दर्ज किए गए थे। बाद में कोर्ट से मैं निर्दोष साबित हुआ था। दरअसल पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर भी मालेगांव बम ब्लास्ट केस की जांच टीम में शामिल थे।

बता दें कि महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में बम ब्लास्ट हुआ था। एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने 17 साल बाद 31 जुलाई 2025 को बड़ा फैसला देते हुए मुख्य आरोपी बीजेपी नेता और पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) समेत सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया था।

वहीं वहीं मामले में NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए महाराष्ट्र एटीएस (ATS) अधिकारी शेखर बागड़े के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। ATS अधिकारी शेखर बागड़े पर सबूत गढ़ने के आरोप है। NIA की चार्जशीट मेंआरोप सामने आया कि बागड़े ने जानबूझकर एक आरोपी के घर में RDX के अंश रखे थे।

अब मामले में पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मोहन भागवत को पकड़ कर लाने के लिए कहा गया था। पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने कहा, “मुझे इस केस में इसलिए शामिल किया गया था ताकि ‘भगवा आतंकवाद’ को साबित किया जा सके।

मुझे सीधे तौर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने के निर्देश दिए गए थे, और ये आदेश तत्कालीन मालेगांव धमाके के प्रमुख जांच अधिकारी परमबीर सिंह और उनके उपर के अधिकारियों ने दिए थे। उन्होंने आगे बताया कि, “सरकार और एजेंसियों का मकसद यह था कि मोहन भागवत और अन्य निर्दोष लोगों को इस मामले में फंसाया जाए। भगवा आतंकवाद की पूरी संकल्पना एक झूठ थी।

मुजावर ने यह भी दावा किया कि जिन संदिग्धों संदीप डांगे और रामजी कलसंगरा की हत्या हो चुकी थी, उन्हें जानबूझकर चार्जशीट में जिंदा दिखाया गया। मुझे आदेश दिया गया कि उनकी लोकेशन ट्रेस करो, जबकि वो मर चुके थे।

मेहबूब मुजावर ने यह भी बताया कि जब उन्होंने इन बातों का विरोध किया और गलत काम करने से इनकार किया, तो उन पर झूठे केस थोपे गए। मुझ पर झूठे मुकदमे डाले गए, लेकिन मैं निर्दोष साबित हुआ। मुजावर ने पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें अब सामने आकर बताना चाहिए कि “क्या हिंदू आतंकवाद जैसी कोई थ्योरी वास्तव में थी?

बॉम्ब ब्लास्ट केस के सभी आरोपी हाल ही में बरी हो चुके हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुजावर ने कहा, मुझे खुशी है कि सभी निर्दोष बरी हुए और इसमें मेरा भी छोटा सा योगदान है। रिटायर इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने इस केस में फैसला आने के बाद काफी अहम खुलासे किए हैं।

उन्होंने पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी 7 आरोपियों को बरी करने के फैसले पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा अदालत के फैसले ने एटीएस के किए गए “फर्जी कामों” को रद्द कर दिया है। दरअसल, मालेगांव बम धमाका केस की जांच पहले एटीएस के हाथों में थी, इसी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को इस केस की जांच करने की कमान सौंप दी गई थी।

मुजावर ने एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम लेते हुए आगे कहा, इस फैसले ने एक फर्जी अधिकारी की ओर से की गई फर्जी जांच का पर्दाफाश कर दिया। मुजावर ने कहा कि वह 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में हुए विस्फोट की जांच करने वाली एटीएस टीम का हिस्सा थे, जिसमें 6 लोग मारे गए थे और 101 घायल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मोहन भागवत को “पकड़ने” के लिए कहा गया था।

उन्होंने एटीएस की जांच को लेकर कहा, मैं यह नहीं कह सकता कि एटीएस ने तब क्या जांच की और क्यों की। लेकिन, मुझे राम कलसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसी हस्तियों के बारे में कुछ गोपनीय आदेश दिए गए थे। साथ ही उन्होंने कहा, ये सभी आदेश ऐसे नहीं थे कि कोई उनका पालन कर सके।