The Duniyadari: अयोध्या- राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर उठे सवालों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की आय-व्यय से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है और नियमित रूप से उसका ऑडिट कराया जाता है।
चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट के कोष का शुरू से अब तक का लेखा-जोखा विधिवत संधारित किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पुणे स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने अयोध्या पहुंचकर खातों की जांच करते हैं और ट्रस्ट कार्यालय को आवश्यक वित्तीय मार्गदर्शन भी देते हैं। अधिकृत व्यक्ति कभी भी इन अभिलेखों का परीक्षण कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के न्यासी बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से किसी से भी नकद दान स्वीकार नहीं किया। केवल दो अवसर ऐसे रहे, जब उनकी दिवंगत बड़ी बहन की ओर से 11 हजार रुपये और एक श्रद्धालु द्वारा एक किलो चांदी की ईंट भेंट की गई, जिसकी विधिवत रसीद जारी की गई थी। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़े सभी भुगतान बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से किए जाते हैं और वह स्वयं बैंक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं। उनके पास कोई चेकबुक भी नहीं है तथा नकद भुगतान की व्यवस्था नहीं है।
इधर, राम कचहरी में आयोजित संत समाज की बैठक में भी चंपत राय के समर्थन में आवाज उठी। संतों ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। उनका कहना था कि यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाने के बजाय जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए।
महंत शशिकांत दास ने कहा कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी की छवि धूमिल करना उचित नहीं है। वहीं, संत सीताराम दास ने भी निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए कहा कि बिना प्रमाण सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से आरोप लगाना गलत परंपरा है।
बैठक में मौजूद अन्य संतों ने भी एक स्वर में पारदर्शी और निष्पक्ष एसआईटी जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पूर्वाग्रह बनाना या उसकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं होगा।















