Wednesday, March 25, 2026
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“सीढ़ियां गायब… दुकान हाजिर! नगर निगम की नजरें ‘आराम मोड’ में”

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The Duniyadari: कोरबा : शहर के सबसे व्यस्त घंटाघर इलाके में अब पैदल चलना भी “लक्ज़री” होता जा रहा है। वजह? बिलासा ब्लड बैंक के पास निगम कॉम्प्लेक्स की सार्वजनिक सीढ़ियां अब सीढ़ियां कम और “चाय बार एक्सटेंशन ब्रांच” ज्यादा नजर आ रही हैं।

कभी आम लोगों के आने-जाने का रास्ता रही ये सीढ़ियां अब धीरे-धीरे “कब्जा विकास योजना” का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं, बल्कि रोज़-रोज़ थोड़ा-थोड़ा कब्जा कर “सीढ़ियों को दुकान” में बदलने की कला का बेहतरीन नमूना है।

जनता पूछ रही है:

क्या अब नगर निगम “सीढ़ी चढ़ने” के लिए भी परमिशन देगा?

या फिर अगला कदम होगा—सड़क पर सोफा लगाकर “लिविंग रूम” खोल देना?

आस-पास के दुकानदार और रहवासी भी हैरान हैं कि आखिर ये “चाय बार की तरक्की” इतनी बेखौफ कैसे हो रही है। सवाल ये भी उठ रहा है कि कहीं इस अवैध कब्जे को कोई “ऊपर से आशीर्वाद” तो नहीं मिला हुआ है, क्योंकि आम आदमी अगर एक ईंट भी आगे रख दे, तो नोटिस तुरंत हाजिर हो जाता है।

नगर निगम की भूमिका पर तंज:

लगता है निगम का अमला इस मामले में “देखो, समझो… और अनदेखा करो” नीति पर काम कर रहा है। शायद फाइलें भी सीढ़ियों की तरह धीरे-धीरे ही आगे बढ़ती होंगी—या फिर कहीं उसी चाय बार में चाय के साथ ठंडी हो रही होंगी।

आखिरी बात:

जनता अब बस यही चाहती है कि सीढ़ियां फिर से सीढ़ियां बन जाएं, और रास्ता रास्ता ही रहे… दुकान नहीं।

लेकिन सवाल वही—

कार्रवाई होगी, या फिर अगली खबर में पूरा कॉम्प्लेक्स ही ‘मार्केट कॉम्प्लेक्स प्लस’ बन जाएगा? 🚧