Thursday, September 17, 2026
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हाईकोर्ट ने लगाई किडनी पेशेंट टीचर के तबादला आदेश पर रोक, शासन को पुनर्विचार के निर्देश

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बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर में दि‌‌व्यांग और किडनी पेशेंट टीचर के ट्रांसफर आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही शासन को उनका ट्रांसफर आदेश निरस्त करने पांच सप्ताह में पुनर्विचार करने का आदेश दिया है।

जानकारी के अनुसार 27 खोली निवासी राजेंद्र शर्मा 70% दिव्यांग होने के साथ ही कई तरह की बीमारी से ग्रसित हैं। उनकी पोस्टिंग शासकीय बॉयज स्कूल सरकंडा में है। बीमार होने के बाद भी टीचर राजेंद्र शर्मा लगातार स्कूल जा रहे हैं। यहां तक किडनी खराब होने के बाद भी उन्होंने स्कूल जाना बंद नहीं किया। स्कूल टाइमिंग के बाद ही वे अपना इलाज कराते हैं। बावजूद इसके शासन ने उनका तबादला जांजगीर-चांपा जिले में कर दिया, जहां उनके इलाज की कोई सुविधा ही नहीं है। ऐसे में उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी।

०-स्थानांतरण आदेश को दी थी चुनौती

राजेंद्र शर्मा अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए  एडवोकेट हर्षल चौहान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता टीचर 70% दिव्यांग होने के साथ-साथ हेपेटाइटिस सी के भी पेशेंट हैं, जिसके कारण बिलासपुर के कुछ अस्पताल में ही उनका डायलिसिस हो पाता है। शहर में पदस्थ होने के कारण उनका इलाज संभव है। दूसरे जिले में ट्रांसफर होने के बाद उनके जीवन पर संकट की स्थिति बन गई है।

केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस पीपी साहू ने शासन के वकील से सवाल किया कि नियम के अनुसार दिव्यांग कर्मचारियों के लिए उनके आवागमन का ख्याल रखते हुए ट्रांसफर करना है। लेकिन, इस मामले में ऐसे हालत क्यों बने, यह चिंता का विषय है।

शासकीय वकील ने उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। तब कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने पर पांच सप्ताह के भीतर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है। और तब तक उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी है।