जनपद की बैठक में हंगामा, अधिकारियों की गैरहाजिरी पर भड़के सदस्य—शिक्षा, पानी, बिजली व आंगनबाड़ी की गड़बड़ियों पर बरसा गुस्सा

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The Duniyadari : तखतपुर। जनपद पंचायत तखतपुर की सामान्य सभा बुधवार को आरोप-प्रत्यारोप और नाराजगी से भर गई। बैठक की शुरुआत होते ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और जनपद सदस्यों ने क्षेत्र में बढ़ती समस्याओं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। अधिकारियों की अनुपस्थिति ने पहले से नाराज़ सदन को और भड़का दिया।

अधिकारी खुद को सदन से बड़ा समझते हैं”—जनप्रतिनिधियों का आरोप

सदस्यों ने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर महीनों से कार्रवाई लंबित है, लेकिन अधिकारी बैठकों में शामिल होना भी जरूरी नहीं समझते। सदस्यों के अनुसार, यह रवैया न केवल विकास कार्यों में बाधा डाल रहा है बल्कि जनता की समस्याएं भी जस की तस बनी हुई हैं।

सदन ने तय किया कि संबंधित अधिकारियों की गैरहाजिरी की शिकायत कलेक्टर से की जाएगी और जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की जाएगी।

शिक्षा विभाग की बड़ी चूक: 50 में से केवल 5 स्कूलों में साइकिल वितरण

बैठक में शिक्षा विभाग की लेटलतीफी सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरी।

सरस्वती साइकिल योजना के तहत ब्लॉक के लगभग 50 स्कूलों में साइकिलें वितरित होनी थीं, लेकिन अब तक सिर्फ 5 स्कूलों में ही वितरण हुआ है।

जनपद सदस्य श्याम सिंह ध्रुव ने बताया कि उनके क्षेत्र की अनेक छात्राएं रोजाना 6–7 किलोमीटर पैदल स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

सदस्य शिक्षण सत्र के अंत में भी साइकिल न मिलने पर बेहद नाराज़ दिखे और सप्लाई ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की।

आंगनबाड़ी में घुन लगी दाल और एक्सपायरी दलिया—अध्यक्ष ने जताया गहरा रोष

महिला एवं बाल विकास विभाग की स्थिति पर भी सदन ने गंभीर चिंता जताई।

जनपद अध्यक्ष डॉ. माधवी वस्त्रकार ने बताया कि कई आंगनबाड़ियों में बच्चों को घुन लगी दाल खिलाई जा रही है। कुछ महीने पहले एक्सपायरी रेडी-टू-ईट दलिया भी बांटा गया था।

जब जवाब मांगा गया तो विभाग ने केवल कार्यकर्ता-सहायिका को नोटिस देने की बात कही, जिस पर अध्यक्ष ने साफ कहा—

गड़बड़ी पर छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाना बंद करें, सुपरवाइजर्स पर कार्रवाई क्यों नहीं?”

अध्यक्ष ने विभाग को निर्देश दिया कि सभी आंगनबाड़ियों में तत्काल भोजन व्यवस्था सुधारी जाए और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

जल जीवन मिशन के कार्य अधूरे, पाइपलाइन और टंकियाँ वर्षों से पेंडिंग

जल जीवन मिशन की प्रगति पर भी सदन ने नाराजगी जताई।

कई पंचायतों में टंकियाँ अधूरी हैं, पाइपलाइन बिछाने का काम आधा है और स्टैंडपोल सालों से अधूरे पड़े हैं।

सदस्यों ने आरोप लगाया कि अधूरे कामों के बावजूद ठेकेदारों को भुगतान हो रहा है। यहां तक कि पंचायत द्वारा खुद कराए गए बोर को भी योजना में जोड़कर राशि आहरण करने की बात सामने आई है।

इंजीनियर तनुजा पटेल ने कहा कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी, लेकिन 2028 तक कार्य पूरा होने की बात पर सदन भड़क गया।

सदस्यों ने कहा—

“क्या ग्रामीण तब तक मीठे पेयजल का इंतजार करते रहें?”

उन्होंने मांग उठाई कि आगामी गर्मी से पहले सभी अधूरे कार्य पूरे कराए जाएं।

विद्युत विभाग पर पक्षपात और भ्रष्टाचार का आरोप

बैठक में बिजली विभाग के अधिकारी नहीं पहुंचे, जिससे सदस्यों का गुस्सा और बढ़ गया।

एक सदस्य ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदलवाने में 15–20 दिन लगते हैं, वह भी पैसे देने के बाद, जबकि राइस मिलों और उद्योगों के लिए 1–2 दिन में ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिया जाता है।

उन्होंने सवाल किया—

“क्या विभाग उद्योगों के लिए अलग से ट्रांसफार्मर स्टॉक रखता है?”

सदन ने पुराने जर्जर तारों को बदलने और ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।

खाद्य विभाग में लापरवाही—राइस मिलों और धरम कांटा की जांच की मांग

खाद्य विभाग का अधिकारी भी बैठक में अनुपस्थित रहा।

जनपद सदस्य ऋषभ कश्यप ने कहा कि पिछली बैठक में राइस मिल संचालकों की पूरी जानकारी मांगी गई थी, पर विभाग ने केवल मिलों के नाम भेजे हैं।

सदस्यों ने कहा कि कई राइस मिलें एनओसी में दर्ज भू-सीमा से अधिक क्षेत्र में काम कर रही हैं।

मनहरण कौशिक ने आरोप लगाया कि कई मिलों में धरम कांटा सेट कर धान तौल में बड़ा खेल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देवरी उपार्जन केंद्र में प्रति बोरा 42 किलो तक धान तौला जा रहा है, जबकि निर्धारित वजन 40.5 किलो है।

सदन के प्रमुख निर्देश

  • जनपद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और संबंधित क्षेत्र के सदस्यों की टीम गठित हो
  • राइस मिलों और उपार्जन केंद्रों का सतत निरीक्षण
  • तौल, एनओसी और संचालन प्रक्रिया की व्यापक जांच
  • आंगनबाड़ी व जल जीवन मिशन के कार्यों का त्वरित सुधार
  • दोषी ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई