The Duniyadari : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति को साल 2017 में झकझोर देने वाला सेक्स सीडी मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। रायपुर सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी को अहम आदेश जारी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आरोपमुक्त करने संबंधी निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही बघेल को अब इस प्रकरण में नियमित ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।
23 फरवरी 2026 को पहली पेशी
सेशन कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई दोबारा शुरू की जाए। भूपेश बघेल के अधिवक्ता फैजल रिजवी के अनुसार, अदालत ने 23 फरवरी 2026 को पहली तारीख तय की है और पूर्व मुख्यमंत्री को प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
बघेल का बयान
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहले ही उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका था, लेकिन दबाव में दोबारा कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि वे कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे और न्याय मिलेगा।
कांग्रेस का तीखा हमला
इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
क्या है सेक्स सीडी कांड?
यह विवाद 2017 में उस समय सामने आया था, जब तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित आपत्तिजनक सीडी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। मामले में पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी हुई और बाद में भूपेश बघेल को भी आरोपी बनाया गया। वर्ष 2024 में सीबीआई की विशेष अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने का हवाला देते हुए बघेल को आरोपमुक्त कर दिया था, लेकिन अब सेशन कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया है।





























