Monday, May 11, 2026
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कोरबा में ‘बचपन की टिकट’ कार्यक्रम से सियासी हलचल, सरोज पांडेय की सक्रियता ने बढ़ाई चर्चाएं

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The Duniyadari: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों कोरबा एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह बनीं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद सरोज पांडेय, जिनके द्वारा आयोजित ‘बचपन की टिकट’ कार्यक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। आयोजन को भले ही सामाजिक और सांस्कृतिक बताया गया, लेकिन इसके पीछे के राजनीतिक संकेतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

सांस्कृतिक आयोजन में दिखी सियासी सक्रियता

शहर के अशोक वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और छात्राएं शामिल हुईं। पारंपरिक खेल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और उत्साह से भरा माहौल कार्यक्रम को सामाजिक रंग दे रहा था, लेकिन मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने इसे राजनीतिक रूप भी दे दिया।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री लखनलाल देवांगन की मौजूदगी के साथ ही कोरबा और बिलासपुर की महापौरों तथा भाजपा संगठन के पदाधिकारियों की भागीदारी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी।

गैर-राजनीतिक दावे पर उठे सवाल

हालांकि सरोज पांडेय ने इसे गैर-राजनीतिक कार्यक्रम बताया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता को जनसंपर्क अभियान के तौर पर देखा जा रहा है।

टिकट की दौड़ में बढ़ी हलचल

कार्यक्रम के बाद भाजपा के भीतर संभावित टिकट दावेदारों में हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं को लगने लगा है कि इस तरह के आयोजन के जरिए जनाधार मजबूत करने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। ‘बचपन की टिकट’ नाम भले ही सरल लगे, लेकिन इसके पीछे छिपे राजनीतिक संकेतों ने कई समीकरणों को बदलने की चर्चा को जन्म दे दिया है।

संकेतों में छिपी चुनावी तैयारी

भारतीय राजनीति में अक्सर बड़े संदेश सीधे नहीं दिए जाते, बल्कि आयोजनों और गतिविधियों के माध्यम से सामने आते हैं। कोरबा का यह कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक संकेत माना जा रहा है कि चुनावी तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है और राजनीतिक जमीन तैयार की जा रही है।