The Duniyadari: Raipur- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों से बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। यही किसी संवेदनशील और प्रगतिशील समाज की वास्तविक पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल श्रम केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और शिक्षा तक सीमित पहुंच के कारण आज भी अनेक बच्चे कम उम्र में काम करने को मजबूर हैं। ऐसे बच्चों का बचपन प्रभावित होता है और वे अपने सर्वांगीण विकास के अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार गरीबी बाल श्रम के प्रमुख कारणों में से एक है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने से कई परिवार अपने बच्चों को काम पर भेजने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा बंधुआ बाल श्रम जैसी कुप्रथाएं भी बच्चों के शोषण को बढ़ावा देती हैं, जहां ऋण या आर्थिक दबाव के कारण बच्चों से श्रम कराया जाता है।
बाल श्रम का असर बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ता है। कम उम्र में कठिन कार्य करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है, जबकि शिक्षा से दूरी उनके भविष्य की संभावनाओं को सीमित कर देती है। लंबे समय तक श्रम करने वाले बच्चे बीमारियों और कुपोषण के अधिक शिकार होते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि कहीं बाल श्रम की जानकारी मिले तो संबंधित अधिकारियों को सूचित करें और बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक भविष्य ही विकसित भारत की मजबूत नींव है।















