The Duniyadari: रायपुर- संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर में हाल ही में संपन्न प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। विभिन्न अभ्यर्थियों, छात्र-युवा संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भर्ती में नियमों की अनदेखी, पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय ने 22 दिसंबर 2025 को सहायक प्राध्यापक, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। आरोप है कि विज्ञापन जारी करने से पहले आवश्यक रोस्टर निर्धारण समिति का गठन नहीं किया गया और रोस्टर रजिस्टर का भी विधिवत संधारण नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार कार्यपरिषद की पूर्व स्वीकृति के बिना ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
भर्ती में शामिल कई अभ्यर्थियों ने पात्रता निर्धारण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ विभागों में योग्य उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि पात्रता और अनुभव संबंधी नियमों की अलग-अलग तरीके से व्याख्या की गई। पर्यावरण विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मेसी, वानिकी सहित कई विषयों के उम्मीदवारों ने अपने आवेदन निरस्त किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ विभागों के नाम और विषय संयोजन पहले की भर्तियों से अलग रखे गए, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी। इसके अलावा विज्ञापन में संबद्ध (एलाइड) विषयों का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से भी कई उम्मीदवारों को आवेदन और पात्रता संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मामले को लेकर युवा कांग्रेस समेत कई संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही भर्ती में शामिल अधिकारियों और निर्णय लेने वाली समितियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई गई है। संगठनों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर नए सिरे से भर्ती कराई जाए।
उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों और निर्धारित आरक्षण प्रावधानों के अनुरूप संपन्न कराई गई है। कुलपति प्रो. राजेंद्र लकपाले का कहना है कि यदि किसी स्तर पर शिकायत या आरटीआई से जुड़ी कोई विसंगति सामने आती है तो उसकी समीक्षा की जाएगी।
फिलहाल यह मामला उच्च शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य शासन और उच्च शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।















