Tuesday, August 18, 2026
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छत्तीसगढ़ BJP में बड़े संगठनात्मक बदलाव की आहट, कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर तेज हुई हलचल

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The Duniyadari:  रायपुर। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में नई टीम के ऐलान के बाद अब छत्तीसगढ़ की सियासत में भी संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश भाजपा में जल्द ही कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति किए जाने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी संगठन के नियमित कामकाज और आने वाले अभियानों को गति देने के लिए यह फैसला ले सकती है।

दरअसल, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे के बाद उपचार और स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में संगठन की गतिविधियों को लगातार सक्रिय बनाए रखने के लिए केंद्रीय नेतृत्व वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है। हालांकि कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

कार्यकारी अध्यक्ष की दौड़ में कौन-कौन?

भाजपा के भीतर संभावित नामों को लेकर चर्चाओं में संतोष पांडेय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। राजनांदगांव से सांसद संतोष पांडेय संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पार्टी के सांगठनिक ढांचे और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता को उनके पक्ष में अहम माना जा रहा है।

दूसरी ओर पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है। लंबे समय से संगठन और मैदानी राजनीति में सक्रिय शिवरतन शर्मा की कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को उनकी बड़ी ताकत माना जाता है।

वहीं रूपकुमारी चौधरी का नाम भी पहले चर्चा में था, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पद की दौड़ में उनकी संभावना फिलहाल कमजोर मानी जा रही है।

क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी अहम

भाजपा के लिए यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक व्यवस्था का मामला नहीं होगी। प्रदेश में नेतृत्व तय करते समय क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव बस्तर क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में यदि पार्टी मैदानी इलाके से किसी वरिष्ठ नेता को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देती है तो संगठन में क्षेत्रीय संतुलन साधने का संदेश जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आदिवासी समाज से आते हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में नए सांगठनिक चेहरे का चयन करते वक्त भाजपा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संतुलन को भी ध्यान में रख सकती है।

संतोष पांडेय के पक्ष में जहां सांसद होने और केंद्रीय नेतृत्व से बेहतर समन्वय का अनुभव माना जा रहा है, वहीं शिवरतन शर्मा की पहचान जमीनी संगठन और कार्यकर्ता नेटवर्क से जुड़े नेता के तौर पर है।

क्या बदलेगी किरण सिंह देव की भूमिका?

इसी बीच सबसे बड़ा सवाल प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की आगे की भूमिका को लेकर भी उठ रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना भी जताई जा रही है कि स्वास्थ्य लाभ के बाद पार्टी उन्हें सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है।

किरण सिंह देव जगदलपुर से विधायक हैं और बस्तर में भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में यदि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो सरकार में बस्तर का प्रतिनिधित्व और मजबूत हो सकता है। हालांकि यह फिलहाल राजनीतिक अटकल है और पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

यदि भविष्य में संगठन की जिम्मेदारी किसी नए चेहरे को स्थायी रूप से सौंपने का फैसला होता है, तो छत्तीसगढ़ भाजपा में यह बदलाव संगठन और सरकार के बीच नए समीकरणों की शुरुआत भी कर सकता है।

नितिन नबीन के बाद प्रदेश प्रभारी की तलाश

छत्तीसगढ़ भाजपा में एक और अहम पद फिलहाल चर्चा में है। बिहार के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी पद से हट गए हैं। ऐसे में अब राज्य के लिए नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति भी पार्टी के एजेंडे में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब निगाहें छत्तीसगढ़ संगठन की अगली घोषणा पर टिक गई हैं। कार्यकारी अध्यक्ष और नए प्रदेश प्रभारी—इन दोनों नियुक्तियों से आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ भाजपा की संगठनात्मक दिशा और राजनीतिक रणनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।