The Duniyadari: रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के घर कार्रवाई की है। कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत ED के अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे और दस्तावेजों की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए घर के बाहर जवानों की तैनाती की गई।
जानकारी के मुताबिक, ED की टीम दो वाहनों से धमतरी पहुंची। टीम में करीब आठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड को खंगाला। कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
72 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय से जोड़ने का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल का करीब 72 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय से संबंध सामने आया है। ED के अनुसार, उन्हें पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किए गए, लेकिन वे निर्धारित समय पर एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। एजेंसी ने अदालत के समक्ष यह भी कहा था कि पूछताछ के दौरान उनका रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा।
राजीव भवन तक कथित नकदी पहुंचने का दावा
ED ने आरोप लगाया है कि कथित शराब घोटाले से उत्पन्न अवैध कमाई का एक हिस्सा रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, बेहिसाब नकदी को रायपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। अब एजेंसी इस कथित लेन-देन के नेटवर्क और इसमें जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
रामगोपाल अग्रवाल को इससे पहले भी कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। 11 अगस्त को अदालत ने उन्हें पांच दिन की ED हिरासत में भेजा था। एजेंसी का कहना था कि पूछताछ के दौरान उनसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
घोटाले की रकम के लेन-देन की जांच
जांच एजेंसी का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका कथित तौर पर घोटाले से प्राप्त रकम के लेन-देन और उसे समायोजित करने से जुड़ी रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध धन किन माध्यमों से आगे पहुंचाया गया और इस पूरी व्यवस्था में किन लोगों की भूमिका थी।
2019 से 2022 के बीच घोटाले का आरोप
ED के मुताबिक, कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच का है, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों के एक कथित नेटवर्क के जरिए आबकारी व्यवस्था को प्रभावित किया गया और इससे सरकारी राजस्व को करीब 2,883 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि अवैध शराब कारोबार से कथित तौर पर प्राप्त कमीशन को राजनीतिक स्तर पर बांटा गया। ED इस मामले में अब तक कई आरोपपत्र दाखिल करने और बड़ी संख्या में लोगों को आरोपी बनाए जाने की बात कह चुकी है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, पूर्व संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया समेत अन्य नाम शामिल हैं।
हालांकि, ED द्वारा लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं और संबंधित आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।



































