The Duniyadari: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को हथियारों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में सोना भी मिल रहा है। पुलिस के मुताबिक बीते करीब दो वर्षों में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए अभियानों के दौरान लगभग 8 किलो सोना बरामद किया जा चुका है। इनमें कई जगहों से सोने के बिस्कुट भी मिले हैं।
पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि नक्सली अपने सामान को सुरक्षित रखने के लिए जंगलों में जमीन के भीतर डंप तैयार करते थे। इन गुप्त ठिकानों में हथियार, नकदी और कीमती धातुओं को प्लास्टिक के ड्रम, बर्तनों तथा अन्य कंटेनरों में छिपाया जाता था। बीजापुर के बासागुड़ा और कुटरू से लेकर दंतेवाड़ा के बारसूर क्षेत्र तक ऐसे कई ठिकानों का पता चला है।
नकदी के बजाय सोने में लगाया पैसा
एंटी-नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद के अनुसार, नक्सली लंबे समय तक नकदी के रूप में रकम रखने को लेकर सतर्क हो गए थे। नोटबंदी के दौरान पुराने नोटों के सामने आई मुश्किलों के बाद उन्होंने कथित तौर पर अपनी आर्थिक संपत्ति का एक हिस्सा सोने में बदलना शुरू किया।
पुलिस का कहना है कि सोने को आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे रकम में बदला भी जा सकता है। इसी वजह से नक्सली नेटवर्क में सोने के बिस्कुट और सिक्कों का इस्तेमाल बढ़ने की बात सामने आई है।
हथियारों के साथ मिले सोने के बिस्कुट
जंगलों में मिले कुछ भूमिगत डंप में पुलिस को आधुनिक हथियारों के साथ सोना भी बरामद हुआ है। इनमें एके-47 जैसी राइफलें और अन्य सामग्री शामिल रही है। जांच के दौरान पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों के बंडल भी कुछ स्थानों से मिलने की जानकारी पुलिस ने दी है। इससे संकेत मिलता है कि नक्सली संगठन का पुराना कैश पूरी तरह खप नहीं पाया था।
कैडरों को भुगतान के लिए भी सोने का इस्तेमाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में नक्सली संगठन के लोगों को रोजमर्रा के खर्च या जरूरतों के लिए नकदी की जगह सोने के बिस्कुट दिए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, जंगलों में मौजूद सभी डंप तक पहुंचना सुरक्षा बलों के लिए आसान नहीं है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई गुप्त ठिकानों की जानकारी संगठन के सीमित और शीर्ष स्तर के नेताओं तक ही रहती थी। इनमें से कई नेता अब मारे जा चुके हैं। ऐसे में सुराग जुटाना चुनौती बना हुआ है।
सरेंडर कर चुके कैडरों से मिल रही मदद
सुरक्षा एजेंसियां अब आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली कमांडरों और वरिष्ठ कैडरों से मिली जानकारी के आधार पर पुराने डंप की तलाश कर रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि ऐसे पूर्व कैडरों से मिली सूचनाओं के जरिए जंगलों में छिपाए गए हथियारों, नकदी और कीमती सामान के अन्य ठिकानों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी।



















