The Duniyadari: बालोद। डौंडी क्षेत्र में आबादी के करीब भालू छोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है। पांच ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने डौंडी वन परिक्षेत्र के रेंजर जीवन भोंडेकर को हटाने की मांग की है।

जनप्रतिनिधियों ने वन मंत्री के नाम तहसीलदार को चार पन्नों का ज्ञापन सौंपा है। इसमें रेंजर को हटाने के साथ उनके कार्यकाल में कराए गए विभिन्न कार्यों की जांच और पूर्व में लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर उचित कार्रवाई की मांग रखी गई है।

मंदिर के पास पकड़ा गया था भालू
बताया गया कि 14 सितंबर को वन विभाग की टीम ने बालोद जिले में रानीमाई मंदिर के समीप घूम रहे एक भालू को पकड़ा था। इसके बाद वन विभाग ने उसे डौंडी वन परिक्षेत्र के मरदेल गांव के आसपास के जंगल में छोड़ दिया।

गांव के नजदीक भालू छोड़े जाने की जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को मिली, लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी के इतने करीब जंगली जानवर को छोड़ने से किसी अप्रिय घटना का खतरा पैदा हो गया है।
वनकर्मियों को ग्रामीणों ने घेरा
मामले को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय खुलकर सामने आया, जब उन्होंने वन विभाग के तीन रेंजरों सहित कर्मचारियों को रोक लिया। काफी देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। सूचना मिलने पर बालोद के एसडीओ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया।
उस दौरान वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि 24 घंटे के भीतर भालू को दोबारा पकड़ लिया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी भालू वन विभाग की पकड़ से बाहर है।
रेंजर की गैरमौजूदगी पर भी सवाल
ग्रामीणों की नाराजगी की एक वजह डौंडी रेंजर जीवन भोंडेकर का मौके पर नहीं पहुंचना भी बताया जा रहा है। घटना के दौरान ग्रामीणों ने रेंजर को हटाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की थी।
अब तक रेंजर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जांच और कार्रवाई की मांग
वन मंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने रेंजर जीवन भोंडेकर को डौंडी क्षेत्र से हटाने की मांग की है। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में हुए कार्यों की जांच कराने तथा पहले लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
कार्रवाई नहीं हुई तो चक्काजाम की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम करने की बात कही गई है।
फिलहाल मरदेल गांव के आसपास भालू की मौजूदगी और उसे पकड़ने में हो रही देरी से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। दूसरी ओर, जनप्रतिनिधियों के ज्ञापन के बाद वन विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।



















