Thursday, November 5, 2026
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छत्तीसगढ़ के दो बड़े घोटालों में आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत, रामगोपाल अग्रवाल और अरुणपति त्रिपाठी को मिली जमानत

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The Duniyadari: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब और मैनपावर घोटाले से जुड़े मामलों में जेल में बंद दो प्रमुख आरोपियों को बिलासपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है। कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और आबकारी विभाग के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी को अदालत ने जमानत दे दी है। हालांकि, रामगोपाल अग्रवाल को अन्य मामलों में अभी जेल में ही रहना होगा।

रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाले से जुड़े प्रकरण में जमानत मिली है। लेकिन कोयला और चावल घोटाले से संबंधित मामलों में राहत नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।

वहीं, अरुणपति त्रिपाठी को मैनपावर घोटाले में करीब 95 दिनों बाद जमानत मिली है। इस मामले में अधिवक्ता शशांक मिश्रा ने उनकी ओर से अदालत में पक्ष रखा था।

क्या है मैनपावर घोटाले का मामला?

जांच एजेंसियों के अनुसार, आबकारी विभाग की शराब दुकानों में कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्यदिवसों के भुगतान में गड़बड़ी की गई थी। आरोप है कि कर्मचारियों को मिलने वाली राशि का भुगतान करने के बजाय फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्लेसमेंट एजेंसियों को अतिरिक्त रकम जारी की गई।

जांच में अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान एजेंसियों को सेवा शुल्क और अन्य मदों में करीब 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने की बात सामने आई। इनमें ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज नामक एजेंसियों को 48 करोड़ रुपये से अधिक दिए जाने का उल्लेख है।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि फर्जी बिलों के जरिए भुगतान कराया गया और इसके बदले नकद कमीशन लिया गया। इस पूरे नेटवर्क में अनवर ढेबर तक रकम पहुंचाने तथा हवाला के माध्यम से पैसे दूसरे शहरों में भेजने के आरोप भी जांच का हिस्सा हैं।

शराब घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल पर क्या आरोप हैं?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि शराब कारोबार से कथित तौर पर जुटाई गई अवैध रकम का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया। ईडी के दावे के मुताबिक, करीब 860 से 880 करोड़ रुपये रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन तक पहुंचाए गए थे।

इस मामले में तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच की गई। एजेंसी ने उनकी लगभग 9.06 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई भी की थी। इसके बाद विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई।

ईडी का आरोप है कि शराब सिंडिकेट से आने वाली रकम के प्रबंधन में लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल की अहम भूमिका थी। एजेंसी ने दावा किया कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर रकम कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाई जाती थी। इस लेन-देन में अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना का नाम भी सामने आया है।

जमानत के बाद भी रामगोपाल की मुश्किलें बरकरार

हाईकोर्ट से शराब घोटाले में जमानत मिलने के बावजूद रामगोपाल अग्रवाल को कोयला और चावल घोटाले के मामलों में जेल में रहना होगा। दूसरी ओर, मैनपावर घोटाले में अरुणपति त्रिपाठी को मिली राहत से उन्हें बड़ी कानूनी राहत जरूर मिली है।

दोनों मामलों में जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए आरोपों और अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।