Wednesday, November 4, 2026
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धान खरीदी केंद्र में बड़ा घोटाला! 1.44 करोड़ की गड़बड़ी उजागर, दो जिम्मेदार गिरफ्तार

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THE DUNIYADARI: कांकेर में सरकारी धान खरीदी के हिसाब में भारी अंतर, 4,651 क्विंटल धान और 11,628 बारदाने का हिसाब नहीं मिला; जांच के बाद दोनों आरोपियों को जेल भेजा गया

भानुप्रतापपुर, 4 नवंबर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर कांकेर जिले से गंभीर मामला सामने आया है। भानुप्रतापपुर क्षेत्र के आसुलखार खरीदी केंद्र में सरकारी धान और बारदानों के रिकॉर्ड का मिलान करने पर बड़ी कमी उजागर हुई है। जांच में 4,651 क्विंटल से अधिक धान और 11,628 बारदाने का हिसाब नहीं मिला। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इससे शासन को लगभग 1 करोड़ 44 लाख 18 हजार 720 रुपये की आर्थिक क्षति हुई है।

मामला खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 का है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति आसुलखार के माध्यम से 748 किसानों से कुल 36,703 क्विंटल धान खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला था। वहीं, दस्तावेजों में 30,855 क्विंटल धान का उठाव दर्ज था। इसके बाद उपलब्ध स्टॉक और अभिलेखों का मिलान कराया गया, जिसमें धान और बारदानों की बड़ी मात्रा का अंतर सामने आया।

गड़बड़ी की गंभीरता को देखते हुए खाद्य शाखा के कलेक्टर कार्यालय ने 10 जून 2026 को जांच दल गठित किया था। खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने केंद्र से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल और भौतिक सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में स्टॉक की कमी की पुष्टि होने के बाद पुलिस कार्रवाई का रास्ता खुला।

जांच में खरीदी केंद्र के धान खरीदी प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन की भूमिका सामने आई। इसके बाद समिति प्रबंधक परमेश महावीर की शिकायत के आधार पर भानुप्रतापपुर थाने में अपराध क्रमांक 226/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला कायम कर जांच शुरू की।

गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टिकेश्वर पोटाई और भोज कुमार जैन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत के आदेश के बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। सरकारी धान खरीदी केंद्र में इतनी बड़ी मात्रा में स्टॉक की कमी सामने आने के बाद अब मामले में आगे की जांच और जिम्मेदारी तय करने पर नजर बनी हुई है।

सरकारी धान खरीदी में करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा, दो कर्मचारी पहुंचे जेल

कांकेर के आसुलखार केंद्र में स्टॉक सत्यापन के दौरान सामने आई भारी कमी, 748 किसानों से खरीदे गए धान के हिसाब में मिला बड़ा अंतर

भानुप्रतापपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर मिलने से कांकेर जिले में हड़कंप मच गया है। आसुलखार धान खरीदी केंद्र में सामने आई अनियमितता का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। जांच में 4,651.20 क्विंटल धान और 11,628 बारदानों से जुड़ी कमी सामने आई है। इसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 44 लाख 18 हजार 720 रुपये बताई गई है। मामले में पुलिस ने केंद्र के दो जिम्मेदार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में आसुलखार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के माध्यम से 748 किसानों से 36,703 क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की गई थी। रिकॉर्ड में इसके मुकाबले 30,855 क्विंटल धान का उठाव दर्ज था। बाद में जब उपलब्ध स्टॉक का मिलान दस्तावेजों से कराया गया तो बड़ी विसंगति सामने आई। इसने खरीदी केंद्र में धान के रखरखाव और बारदाना प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

अधिकारियों की संयुक्त जांच में खुली गड़बड़ी

शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। 10 जून 2026 को गठित समिति में खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को शामिल किया गया था। टीम ने खरीदी केंद्र के रिकॉर्ड की जांच करने के साथ मौके पर उपलब्ध सामग्री का सत्यापन किया। जांच प्रतिवेदन में सामने आई कमी के आधार पर आर्थिक नुकसान का आकलन किया गया।

समिति प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने की कार्रवाई

जांच में धान खरीदी प्रभारी टिकेश्वर पोटाई और बारदाना प्रभारी भोज कुमार जैन की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे। इसके बाद समिति प्रबंधक परमेश महावीर की शिकायत पर भानुप्रतापपुर पुलिस ने 1 नवंबर 2026 को अपराध क्रमांक 226/2026 दर्ज किया। भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई।

दोनों आरोपियों को अदालत से नहीं मिली राहत

मामले में पुलिस ने टिकेश्वर पोटाई और भोज कुमार जैन को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया गया। अब इस मामले में पुलिस की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी सामने आना बाकी है कि स्टॉक में इतनी बड़ी कमी किन परिस्थितियों में हुई और इसमें अन्य किसी की भूमिका तो नहीं थी।