The Duniyadari: Bilaspur – Life Insurance Corporation of India को पॉलिसी के ग्रेस पीरियड की गलत गणना करना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग बिलासपुर ने बीमा दावा खारिज करने को सेवा में गंभीर कमी मानते हुए मृतक के परिजनों के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने एलआईसी को ब्याज सहित 9 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय की राशि भी अदा करने को कहा गया है।
मदनपुर निवासी सनत कुमार वैष्णव ने वर्ष 2023 में एलआईसी की जीवन लक्ष्य पॉलिसी ली थी। जनवरी 2025 में एनएच-130 पर हुए सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके भाई और नामिनी प्रदीप कुमार ने बीमा दावा पेश किया, लेकिन एलआईसी ने यह कहते हुए भुगतान से इनकार कर दिया कि प्रीमियम समय पर जमा नहीं होने से पॉलिसी लैप्स हो चुकी थी।
कंपनी का कहना था कि तिमाही प्रीमियम 28 दिसंबर 2024 को देय था और 30 दिन का ग्रेस पीरियड 26 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था। चूंकि दुर्घटना 27 जनवरी को हुई, इसलिए जोखिम कवर लागू नहीं माना गया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने एलआईसी की इस गणना को गलत पाया। आयोग ने सामान्य धाराएं अधिनियम, 1897 की धारा 9 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि समय की गणना में पहला दिन शामिल नहीं किया जाता। इस आधार पर आयोग ने माना कि 30 दिन का ग्रेस पीरियड 27 जनवरी 2025 की मध्यरात्रि तक प्रभावी था। इसलिए दुर्घटना के समय पॉलिसी पूरी तरह सक्रिय थी और बीमाधारक दावा पाने का अधिकारी था।
आयोग ने कहा कि कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर दावा खारिज करना सेवा में कमी है। आदेश में एलआईसी को 45 दिनों के भीतर मूल बीमित राशि, दुर्घटना मृत्यु लाभ और टीए राइडर सहित कुल 9 लाख रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा 17 नवंबर 2025 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार और वाद व्यय के लिए 5 हजार रुपए अलग से देने का आदेश भी आयोग ने दिया है।















