Thursday, March 12, 2026
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कुर्सी का विवाद और जमीन पर पायलट; गहलोत की फाइनल घेराबंदी के लिए सचिन गुट की 3 स्ट्रैटजी

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राजस्थान में मौसम का पारा भले 20 डिग्री के आसपास हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर की सियासी तपिश उफान पर है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पार्टी हाईकमान अब तक विवाद सुलझाने में नाकाम रहा है. इसको लेकर पायलट गुट अब बिगूल फूंकने की तैयारी में है.

सूत्रों के मुताबिक मकर संक्रांति के बाद सचिन पायलट करीब 5 रैली और रोड शो करेंगे. सभी रैलियां कांग्रेस के गढ़ में होगी, जहां पायलट गुट के मंत्री और विधायक शामिल होंगे. रैली में बेरोजगारी और महंगाई को मुख्य मुद्दा बनाया गया है. पायलट की रैलियों ने बजट सत्र में जुटी गहलोत सरकार की टेंशन बढ़ा दी है.

1. अनुशासनहीनता के आरोपी नेताओं पर कार्रवाई- सचिन पायलट गुट की सबसे बड़ी मांग अनुशासहीनता के आरोपी 2 मंत्री और एक नेता के खिलाफ कार्रवाई. 25 सितंबर को दिल्ली से मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन को कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर बना कर भेजा था. मुख्यमंत्री आवास पर विधायकों की मीटिंग होनी थी, लेकिन मीटिंग में 80 से ज्यादा विधायक नहीं आए.

इस पूरे प्रकरण में ऑब्जर्वर ने मंत्री शांति धारीवाल और महेश जोशी के अलावा मुख्यमंत्री गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ को आरोपी बनाया. इस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पायलट गुट में भारी नाराजगी है.

2. चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदला जाए- पंजाब की तरह राजस्थान में भी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदलने की मांग पायलट गुट लगातार कर रहे हैं. 25 सितंबर की मीटिंग कैंसिल होने के बाद हाईकमान की ओर से कहा गया कि जल्द ही फिर एक मीटिंग आयोजित की जाएगी, लेकिन वो भी ठंडे बस्ते में है.