The Duniyadari: KORBA –
“चलो आयुर्वेद की ओर” मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए “बच्चे रहे स्वस्थ” योजनान्तर्गत नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय दुकान क्रमांक 10,11 महानदी कांपलेक्स निहारिका रोड कोरबा में दिनांक 21 मई 2026 गुरुवार को अति शुभ गुरु पुष्य नक्षत्र में आयुर्वेदिक इम्यूनाईजेसन प्रोग्राम के तहत कराया गया स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण-डॉ. नागेन्द्र शर्मा।
स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार अत्यंत प्रभावशाली इम्युनिटी बूस्टर -डॉ. नागेन्द्र शर्मा।

“चलो आयुर्वेद की ओर” मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए “बच्चे रहे स्वस्थ” योजनान्तर्गत नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय दुकान क्रमांक 10,11 महानदी कांपलेक्स निहारिका रोड कोरबा में दिनांक 21 मई 2026 गुरुवार को अति शुभ गुरु पुष्य नक्षत्र में आयुर्वेदिक इम्यूनाईजेसन प्रोग्राम के तहत बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन ड्रॉप्स पिलाकर आयुर्वेद पद्धति से टीकाकरण किया गया। स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार के बारे में बताते हुए संस्थान के चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार 16 संस्कारों में से एक संस्कार है, जो बच्चे के जन्म से लेकर 18 वर्ष तक की आयु तक कराया जाता है। स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार आयुर्वेद चिकित्सा की वह धरोहर है जो बच्चों में होने वाली मौसमी बीमारियों से बच्चों की सुरक्षा करता है। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह अत्यंत ही प्रभावशाली इम्युनिटी बूस्टर है, जो बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार शिविर में चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, नेत्रनन्दन साहू, अश्वनी बुनकर, कमल धारिया, अरुण मानिकपुरी, देवबली कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, राकेश इस्पात, पंचकर्म थेरेपीस्ट पिंकी बरेठ एवं सिमरन जायसवाल ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।















