Thursday, June 11, 2026
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मानिकपुर ओ.सी.एम. में फ्लाई ऐश प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोयला मंत्री से स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की

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The Duniyadari: KORBA- मानिकपुर ओपन कास्ट माइंस (ओ.सी.एम.), कोरबा क्षेत्र में फ्लाई ऐश के कथित अनियंत्रित संचयन, धूल प्रदूषण एवं पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ जयसिंह अग्रवाल ने माननीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी को पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

श्री अग्रवाल ने कहा है कि कोयला मंत्रालय द्वारा एसईसीएल प्रबंधन से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर भेजे गए उत्तर का परीक्षण करने पर यह प्रतीत होता है कि वास्तविक स्थल परिस्थिति एवं स्थानीय स्तर पर उत्पन्न समस्याओं का समुचित एवं तथ्यात्मक उल्लेख नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि मूल शिकायत का प्रमुख विषय यह था कि मानिकपुर क्षेत्र में फ्लाई ऐश का वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग करने के स्थान पर बड़े-बड़े खुले ढेर (Ash Heap Formation) के रूप में संचयन किया गया है, जिसके कारण तेज हवाओं एवं गर्मी के दौरान सूक्ष्म धूल कण पूरे क्षेत्र में फैल रहे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों, श्रमिकों एवं आसपास रहने वाले लोगों को वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं एवं आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

श्री अग्रवाल ने एसईसीएल के प्रतिवेदन पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रबंधन द्वारा फ्लाई ऐश प्रबंधन के संबंध में कई तकनीकी दावे किए गए हैं, लेकिन इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र पर्यावरणीय परीक्षण रिपोर्ट, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग रिपोर्ट, पीएम-10 एवं पीएम-2.5 डेटा, थर्ड पार्टी पर्यावरणीय ऑडिट रिपोर्ट अथवा स्वास्थ्य प्रभाव संबंधी कोई अध्ययन प्रस्तुत नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि फ्लाई ऐश भराव कार्य पूर्णतः वैज्ञानिक एवं नियंत्रित तरीके से किया जा रहा है, तो फिर लगातार फॉगिंग कैनन, वाटर स्प्रिंकलर, पानी के टैंकर एवं अन्य धूल नियंत्रण उपायों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

श्री अग्रवाल ने यह भी उल्लेख किया कि एसईसीएल द्वारा अपने प्रतिवेदन में कहा गया है कि दिनांक 05 नवंबर 2025 से फ्लाई ऐश भराव कार्य अस्थायी रूप से बंद है, जबकि स्थानीय परिस्थितियां एवं उपलब्ध दृश्य साक्ष्य इसके विपरीत संकेत दे रहे हैं। उन्होंने 9 जून 2026 को मानिकपुर ओ.सी.एम. क्षेत्र से प्राप्त फोटोग्राफ एवं वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष स्थल निरीक्षण आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि एसईसीएल द्वारा लगभग 27 मिलियन क्यूबिक मीटर फ्लाई ऐश उपयोग का उल्लेख किया गया है। इतनी विशाल मात्रा में फ्लाई ऐश के उपयोग एवं निपटान से संबंधित विषय को केवल विभागीय प्रतिवेदन के आधार पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसका दीर्घकालीन प्रभाव पर्यावरण, भू-जल, वायु गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि मूल शिकायत में सड़क दुर्घटनाओं, धूल प्रदूषण, श्वसन संबंधी समस्याओं एवं स्थानीय जनजीवन पर पड़ रहे प्रभावों का उल्लेख किया गया था, लेकिन एसईसीएल द्वारा न तो कोई स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और न ही कोई स्वतंत्र पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने माननीय कोयला मंत्री से मांग की है कि—

1. मानिकपुर ओ.सी.एम. में फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं वर्तमान स्थिति की जांच हेतु स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।

2. समिति में पर्यावरण विशेषज्ञ, प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञ, स्वतंत्र तकनीकी संस्थान एवं स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

3. समिति द्वारा स्थल का वास्तविक भौतिक निरीक्षण कर फ्लाई ऐश संचयन, धूल प्रदूषण एवं नियंत्रण उपायों की स्थिति का परीक्षण कराया जाए।

4. वायु गुणवत्ता, भू-जल, धूल प्रदूषण एवं जनस्वास्थ्य प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।

5. एसईसीएल द्वारा प्रस्तुत दावों एवं वास्तविक स्थल परिस्थितियों के बीच अंतर पाए जाने पर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

श्री अग्रवाल ने कहा कि यह विषय केवल एक खनन परियोजना का विषय नहीं है, बल्कि हजारों स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा जनहित का मामला है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर प्रभावित क्षेत्रों एवं फ्लाई ऐश संचयन स्थलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराने में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।