Sunday, March 15, 2026
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गृह विभाग की अनुदान मांगों पर विधानसभा में मत विभाजन, कई विधायक रहे गैरहाजिर

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The Duniyadari: कटौती प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष ने वोटिंग की मांग की, कैबिनेट बैठक छोड़कर सदन पहुंचे मुख्यमंत्री और मंत्री।

रायपुर, 10 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सदन में अलग ही माहौल देखने को मिला। विपक्ष ने अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने मत विभाजन की मांग कर दी, जिसे आसंदी ने मंजूरी दे दी।

मत विभाजन की घोषणा होते ही सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय नजर आए। जानकारी के अनुसार भाजपा के कुल 54 विधायकों में से 17 विधायक उस समय सदन में मौजूद नहीं थे, जबकि विपक्ष के भी 10 विधायक अनुपस्थित रहे।

सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कई मंत्री कैबिनेट की बैठक छोड़कर सीधे विधानसभा पहुंचे। इसके बाद सदन में वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। संख्याबल सत्तापक्ष के पक्ष में होने के कारण मतदान के बाद गृह विभाग की अनुदान मांगें पारित हो गईं। वोटिंग में सत्ता पक्ष के पक्ष में 37 और विपक्ष की ओर से 24 वोट पड़े।

छत्तीसगढ़ के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब गृह विभाग की अनुदान मांगों पर मत विभाजन की स्थिति बनी।

चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बलरामपुर जिले में कथित अफीम की खेती का मुद्दा उठाते हुए गृहमंत्री से जवाब मांगा।

वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य में अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई राशि का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार को करीब 21 हजार 530 करोड़ रुपये देने के लिए पत्र भेजा गया है। महंत ने सवाल किया कि इतनी बड़ी राशि राज्य सरकार किस बजट से देगी।

महंत ने यह भी कहा कि पूर्व में यूपीए सरकार के दौरान राज्यों से इस तरह की राशि की मांग नहीं की जाती थी। इस मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक बहस चलती रही।