Monday, September 21, 2026
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छत्तीसगढ़ BJP में बदलाव की आहट, कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति पर बढ़ी हलचल; तोखन साहू का नाम सबसे आगे

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The Duniyadari: रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में जल्द बड़ा बदलाव होने की चर्चा ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के सड़क हादसे में घायल होने के बाद संगठन के कामकाज को लेकर नई व्यवस्था की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच केंद्रीय राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू को दिल्ली बुलाए जाने से उन्हें कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने की अटकलें तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि किरण सिंह देव के स्वास्थ्य कारणों से संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी फिलहाल प्रभावित हुई है। ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश संगठन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

कई दिग्गजों के नाम चर्चा में

कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए तोखन साहू के साथ भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में हैं। इनमें पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, कुरुद विधायक अजय चंद्राकर, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल शामिल बताए जा रहे हैं।

पार्टी के भीतर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिए जाने की संभावना है। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाली बैठकों और शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर प्रदेश भाजपा की नजर बनी हुई है।

तोखन साहू के नाम के पीछे क्या है वजह?

तोखन साहू केंद्र सरकार में राज्य मंत्री होने के साथ बिलासपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। ऐसे में उन्हें प्रदेश संगठन की कमान दिए जाने की स्थिति में भाजपा के लिए यह फैसला राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाएगा।

साहू समाज की प्रदेश में मजबूत सामाजिक मौजूदगी को देखते हुए OBC प्रतिनिधित्व का पहलू भी इस चर्चा में अहम माना जा रहा है। भाजपा लंबे समय से सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्व देती रही है।

बिलासपुर संभाग पर भी नजर

छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए बिलासपुर संभाग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में इस इलाके से आने वाले किसी प्रमुख नेता को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने से क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी के नेटवर्क को मजबूत करने की संभावना देखी जा रही है।

फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सबकी निगाहें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हैं। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह साफ होगा कि प्रदेश संगठन की अंतरिम जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाती है।