The Duniyadari: कोरबा, 06 फरवरी। कोरबा जिले के ग्राम जरहाजेल के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े नियमों और अवार्ड की शर्तों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने अधिग्रहित जमीन मूल खातेदारों को लौटाने और गांव में जारी पेड़ों की कटाई तत्काल रोकने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन लेने के बाद भी उन्हें न रोजगार मिला और न ही पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई। इसके विपरीत अब जरहाजेल में अन्य गांवों के लोगों को बसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे स्थानीय परिवारों में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ रहा है।
भू-विस्थापित दामोदर श्याम, इंद्र प्रकाश और घासीराम कैवर्त के मुताबिक वर्ष 1983 में पारित अवार्ड के तहत मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 247(1) के अंतर्गत भूमि अधिग्रहित की गई थी। बाद में धारा 247(3) के तहत कोयला उत्खनन की अनुमति दी गई, जिसमें तत्कालीन प्रशासन ने कुछ शर्तों के साथ एसईसीएल को जमीन पर दखल का अधिकार दिया था। ग्रामीणों का दावा है कि इन शर्तों में तय समयसीमा के बाद जमीन लौटाने, विस्थापित परिवारों को मूलभूत सुविधाएं देने और भूमि वापसी तक भू-राजस्व भुगतान का प्रावधान शामिल था, लेकिन इनका पालन नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने यह भी आपत्ति जताई कि अवार्ड में अन्य गांवों को जरहाजेल में बसाने का उल्लेख नहीं था, फिर भी जबरन पुनर्वास की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि मुआवजा और रोजगार से जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं, जबकि प्रभावित परिवार आज तक स्थायी बसावट से वंचित हैं।
ज्ञापन में यह सवाल भी उठाया गया कि जब संबंधित अवार्ड के दस्तावेज ही स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, तो जमीन का उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई और जमीन वापस करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान दीपक साहू, फीरत, हरिशरण, राकेश, लक्ष्मण, वीरेंद्र, सुमेंद्र, बृहस्पति और दीनानाथ समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
































