The Duniyadari : निर्माण कार्यों में लापरवाही पर कलेक्टर सख्त, जांच के साथ कार्रवाई के निर्देश

कोरबा। खनन प्रभावित क्षेत्रों में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि से चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार को कटघोरा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी, स्कूल और पीडीएस भवनों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कई खामियां पकड़ीं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
जेन्जरा में मानक से कम मोटाई का सरिया मिला
ग्राम पंचायत जेन्जरा में बन रहे आंगनबाड़ी भवन की जांच के दौरान कलेक्टर ने निर्माण में इस्तेमाल हो रहे सरिए की गुणवत्ता पर संदेह जताया। मौके पर माप कराने पर कई जगह 8 एमएम के बजाय 6 एमएम का सरिया लगा मिला। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए निर्माण कार्य का पंचनामा बनाने और संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। सब इंजीनियर रामकुमार पोर्ते के निलंबन की कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए।
स्कूल में टाइल्स की गुणवत्ता पर सवाल
जेन्जरा के निर्माणाधीन स्कूल भवन में फर्श पर लगाए गए टाइल्स की भी जांच की गई। निर्धारित मापदंड के अनुरूप टाइल्स नहीं मिलने पर कलेक्टर ने अधिकारियों को फटकार लगाई और निर्माण एजेंसी को तय मानकों के अनुसार कार्य कराने के निर्देश दिए।
पीडीएस भवन की प्लिंथ पर भी जताई नाराजगी
सलोरा में बन रहे पीडीएस भवन की प्लिंथ जमीन के अपेक्षाकृत काफी नीचे पाए जाने पर भी कलेक्टर ने आपत्ति जताई। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।
स्कूल भवन का काम अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश
कटघोरा के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चल रहे भवन निर्माण की प्रगति का भी कलेक्टर ने जायजा लिया। काम में देरी पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए निर्माण की गति बढ़ाने और अक्टूबर तक भवन पूरा करने के निर्देश दिए। जेन्जरा के पुराने और जर्जर आंगनबाड़ी भवन का भी निरीक्षण किया गया।
लंबित फाइलों पर भी होगी कार्रवाई
जनपद पंचायत कटघोरा में समीक्षा के दौरान लंबित फाइलों और उपयोगिता प्रमाण पत्रों का मुद्दा भी सामने आया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्ण हो चुके कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र बेवजह लंबित न रखे जाएं। उन्होंने अनावश्यक रूप से फाइल रोकने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने को कहा। जेन्जरा के उपयोगिता प्रमाण पत्र में देरी के मामले में संबंधित बाबू का वेतन रोकने के निर्देश भी दिए गए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि डीएमएफ की राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयसीमा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

























