The Duniyadari: कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के संचालन को लेकर कोरबा जनपद पंचायत की आवास शाखा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक-1 की सदस्य एवं सहकारिता एवं उद्योग समिति की सभापति रेणुका राठिया ने आवास शाखा में कार्यरत पूरे अमले को हटाने की मांग करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत दी है। शिकायत सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।

क्षेत्रीय दौरे के दौरान सामने आईं शिकायतें
रेणुका राठिया के मुताबिक क्षेत्र में भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित कार्यों को लेकर उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने पत्र में आवास योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर बिंदुओं की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से उनका नाम लेकर आवास योजना के हितग्राहियों से पैसे मांगे जाने की बातें उनके सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हितग्राहियों को हो रही परेशानी का मुद्दा
शिकायत में योजना के लाभार्थियों को होने वाली दिक्कतों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि आवास से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी और प्रक्रियागत परेशानियों के कारण जरूरतमंद परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रेणुका राठिया ने इस बात पर जोर दिया है कि पीएम आवास योजना सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों से जुड़ी है। इसलिए योजना से जुड़े काम में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता का असर सीधे हितग्राहियों पर पड़ता है।
पुराने मामलों का भी दिया हवाला
भाजपा नेत्री ने अपने पत्र में दावा किया है कि आवास शाखा की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं होने की बात कही गई है। इसी आधार पर उन्होंने अब आवास शाखा के मौजूदा पूरे स्टाफ को हटाने की मांग अधिकारियों के सामने रखी है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
जिला पंचायत CEO को दिए गए पत्र के बाद अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि शिकायत एक निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य की ओर से की गई है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है, जबकि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाने पर तस्वीर अलग होगी।












