Tuesday, March 17, 2026
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सीएसआर फंड के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी, अंतरराज्यीय गैंग के 5 सदस्य गिरफ्तार

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The Duniyadari: रायगढ़ में सीएसआर फंड दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो टेलीग्राम के माध्यम से साइबर अपराधियों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और इसके बदले मोटा कमीशन लेते थे।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ देशभर में अब तक 44 साइबर ठगी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जांच में यह भी पता चला है कि एक एनजीओ कार्यकर्ता के बैंक खाते के जरिए करीब 2 करोड़ 17 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया।

मामले की शिकायत रायगढ़ के इंदिरानगर में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता आयशा परवीन ने 12 मार्च को साइबर थाना रायगढ़ में दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में उनके भांजे ने उनकी मुलाकात अभय यादव और विजय चंद्रा से करवाई थी। दोनों ने दावा किया कि एक बड़ी कंपनी सीएसआर मद के तहत सामाजिक कार्यों के लिए अनुदान देना चाहती है। भरोसा दिलाकर आरोपियों ने उनसे उनके एनजीओ से जुड़े पंजीयन दस्तावेज ले लिए।

कुछ समय बाद विजय चंद्रा ने अपने साथियों अजय साहू और सचिन चौहान से उनका संपर्क कराया। आरोपियों के कहने पर महिला ने अपने संस्थान के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया। खाता खुलने के बाद आरोपियों ने ऑनलाइन बैंकिंग की पूरी प्रक्रिया खुद पूरी कर ली और एमपिन समेत अन्य लॉगिन संबंधी जानकारी अपने पास रख ली।

इसके बाद महिला और उनके पति को अनुदान और नौकरी से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर गुवाहाटी बुलाया गया। आरोपियों ने उनके लिए फ्लाइट टिकट और होटल की व्यवस्था भी कराई। होटल में दो अज्ञात लोगों ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताते हुए महिला के मोबाइल में एक एपीके फाइल डाउनलोड कराई और एनजीओ के खाते को रजिस्टर करने की बात कही।

महिला के अनुसार होटल में एक सप्ताह तक उन्हें रोककर कई बार मोबाइल लेकर जांच के नाम पर बैंकिंग गतिविधियां की जाती रहीं। बाद में खाता में तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर उन्हें 12 जनवरी 2026 को रायगढ़ वापस भेज दिया गया।

रायगढ़ लौटने के बाद महिला को बैंक से कॉल आया, जिसमें उनके खाते में संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दी गई। 14 जनवरी को बैंक ने स्पष्ट किया कि खाते के माध्यम से साइबर फ्रॉड से जुड़े ट्रांजेक्शन किए जा रहे हैं। इसके बाद महिला को देश के अलग-अलग राज्यों से ईमेल मिलने लगे, जिनमें उनके खाते में ठगी से जुड़ी रकम जमा होने की शिकायतें दर्ज थीं।

जांच में सामने आया कि 29 दिसंबर 2025 से ही उनके खाते से संदिग्ध लेनदेन शुरू हो गए थे। जब महिला ने इस बारे में विजय चंद्रा से संपर्क किया तो उसने बैंक की गलती बताकर टाल दिया और बाद में संपर्क ही बंद कर दिया।

शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने जांच शुरू की और अंतरराज्यीय साइबर गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी अभय यादव पहले एक स्थानीय बैंक में काम कर चुका है और उसकी पहचान विजय चंद्रा से पहले से थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर अन्य साथियों के साथ टेलीग्राम ग्रुप के जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से संपर्क किया।

यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था। इसके बदले आरोपी 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। पूछताछ में आरोपियों ने 25 से 30 बैंक खाते विभिन्न राज्यों में उपलब्ध कराने की बात कबूल की है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। शुरुआती जांच में साइबर पुलिस के समन्वय पोर्टल पर महिला के खाते से जुड़े 44 साइबर ठगी के मामलों की जानकारी सामने आई है, जिनमें करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।