The Duniyadari: जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी बिलों के माध्यम से भोपाल की एक निजी कंपनी को करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच में मिली अनियमितताएं, स्टोर कीपर निलंबित
जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के बाद स्टोर कीपर नीरज कौरव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि दो अन्य कर्मचारियों को सीएमएचओ कार्यालय से हटा दिया गया। शिकायत में बताया गया था कि बिना अनुमति साइनेज और स्वास्थ्य केंद्र सामग्री की खरीदी के नाम पर परचेज ऑर्डर जारी किया गया। इसके बाद 12 फर्जी बिलों के जरिए भोपाल की सिंह इंटरप्राइजेज को 93 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।
जांच के दौरान जब सामग्री का भौतिक सत्यापन किया गया तो स्टोर में सामान मौजूद नहीं मिला। इसके बाद प्रशासन ने स्टोर को सील कर दिया और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
सीएमएचओ ने दी सफाई
सीएमएचओ डॉ. संजय शर्मा ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि घोटाला तभी माना जाएगा जब भुगतान के बाद सामान न पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग को मिलने वाला बजट अक्सर वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में मिलता है, ऐसे में जेम पोर्टल के माध्यम से सीमित समय में खरीदी करनी होती है।
उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबसे कम दर वाली फर्म (एल-1) को ऑर्डर दिया जाता है। कई बार फर्म तत्काल सप्लाई नहीं कर पाती क्योंकि सामग्री को ऑर्डर के अनुसार तैयार किया जाता है। मार्च के अंत में पोर्टल बंद होने के कारण भुगतान अटक सकता है, जिससे बजट लैप्स होने का खतरा रहता है। ऐसे हालात में कई बार बजट समाप्त होने से पहले भुगतान करना पड़ता है।
फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और प्रशासन आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।















